माडमसिल्ली बांध लबालब : पूर्ण जलभराव होते हो एशिया एक मात्र सायफन सिस्टम हुआ ऑटोमेटिक एक्टिवेट
103 साल पुराने मॉडमसिल्ली बांध है देश का एकलौता बांध है जो सायफन सिस्टम होने के साथ चालू हालत में है


एशिया का एक मात्र सायफन सिस्टम वाले धमतरी जिले के मॉडमसिल्ली बांध के लबालब होते ही बांध के गेट खुल गए है जिससे नजारा मनोरम हो गया है.
बताया जा रहा है कि लगभग 98 प्रतिशत जल का भराव होते ही बांध का सायफन सिस्टम ऑटोमेटिक एक्टिवेट हो गया है.बांध मे कुल 5.839 टीएमसी जलभराव क्षमता है.
बता दे कि सायफन अलग अलग लेवल में बना हुआ है. जैसे जैसे पानी का स्तर बढ़ते जाता है, वैसे वैसे ही वे चालू हो जाते है, जो बांध को सुरक्षित करता है.
धमतरी जिले में कुल 4 बांध है, जिसमें से एक माडमसिल्ली बांध भी है. जिसे अब बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव बांध के नाम से भी जाना जाता है. अंग्रेजों द्धारा बनाए गए इस बांध में कई खासियत है. जिले का माडमसिल्ली बांध पूरे एशिया का एकमात्र साइफान सिस्टम बांध है. इसमें पानी ऊंचाई से नीचे की ओर गिरता है, जिसके कारण यह खूबसूरत और मनमोहक लगता है.
1923 में बनकर तैयार हुआ था
माडमसिल्ली बांध: बांध का निर्माण इंग्लैंड की रहने वाली महिला इंजीनियर मैडम सिल्ली ने की थी, जिसके चलते इस बांध का नाम माडम सिल्ली पड़ा. इस बांध की और एक खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए ईंट सीमेंट और लोहे का उपयोग नहीं किया गया था. सन् 1914 में इसका निर्माण कार्य शुरू किया गया था, जो सन् 1923 में बनकर तैयार हुआ था.
सायफन सिस्टम वाला एकलौता बांध:
देश का ये एकलौता बांध है जो सायफन सिस्टम होने के साथ चालू हालत में है. तकरीबन 103 साल की उम्र बीत जाने के बाद भी इस बांध की मजबूती में कोई फर्क नहीं आया है. आज भी इसके सभी गेट चालू हालत में है. बारिश के मौसम मे बांध लबालब होते ही ऑटोमेटिक सायफन गेट से पानी निकलना शुरू हो जाता है. इस बांध में 34 सायफन सिस्टम हैं. इसके अंदर बेबी सायफन भी है.
