मोदी सरकार ने युवाओं के भविष्य से किया खिलवाड़, शिक्षा व्यवस्था को संकट में धकेला : विधायक ओंकार साहू

धमतरी। विधायक ओंकार साहू ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर में युवाओं, छात्रों और शिक्षा व्यवस्था के मुद्दों को लेकर कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शन का समर्थन करते हुए केंद्र की मोदी सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में देश की शिक्षा व्यवस्था गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं ने लाखों विद्यार्थियों का भरोसा कमजोर किया है।
विधायक ओंकार साहू ने कहा कि भाजपा के शासनकाल में कई राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप सामने आए। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने के बावजूद केंद्र सरकार प्रभावी सुधार करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि इससे लाखों युवाओं की वर्षों की मेहनत और भविष्य प्रभावित हुआ है।
उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा को लेकर भी पूरे देश में गंभीर विवाद और विरोध देखने को मिला। लाखों विद्यार्थियों और अभिभावकों ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। ऐसे मामलों ने छात्रों का मानसिक, आर्थिक और शैक्षणिक नुकसान किया, लेकिन केंद्र सरकार समय पर विश्वास बहाल करने में असफल रही।ओंकार साहू ने कहा कि जब छात्र अपने भविष्य और शिक्षा व्यवस्था को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से आवाज़ उठाते हैं, तब उनकी मांगों को गंभीरता से सुनने के बजाय उन पर पुलिस कार्रवाई और हिरासत जैसी घटनाएं सामने आती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार छात्रों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनकी आवाज़ दबाने का प्रयास कर रही है।उन्होंने कहा कि आज देश का युवा महंगाई, बेरोज़गारी, भर्ती में देरी और परीक्षा संबंधी अनिश्चितताओं से जूझ रहा है। युवाओं को रोजगार और सुरक्षित भविष्य देने के बजाय भाजपा सरकार केवल प्रचार में व्यस्त है। शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है, जिससे वह बच नहीं सकती।विधायक ओंकार साहू ने कहा कि कांग्रेस पार्टी युवाओं के अधिकार, निष्पक्ष परीक्षाओं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के अवसरों की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ती रहेगी। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि परीक्षा लीक के मामलों में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए जाएं तथा देश के युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए।

