कमरछठ पर्व कल, बाजार में रौनक, तैयारियों में जुटीं महिलाएं
पूजन सामग्री की खरीदारी तेज, पसहर चावल, छह प्रकार की भाजियां, भैंस के दूध-दही, फल-फूल और पारंपरिक सामग्री की है डिमांड

धमतरी। संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना का पर्व कमरछठ (हलषष्ठी) बुधवार को जिलेभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। भादो के कृष्ण पक्ष की छठी तिथि पर हलषष्ठी पर्व मनाया जाता है। पर्व को लेकर धमतरी शहर के बाजारों में रौनक बढ़ गई है और महिलाएं पूजा की तैयारियों में जुट गई हैं।
शहर के इतवारी बाजार, रामबाग, बालक चौक, आमापारा, मकई चौक और अन्य बाजारों में पूजन सामग्री, फल-फूल, महुआ, कुश, मिट्टी के बर्तन तथा अन्य पारंपरिक सामग्री की खरीदारी पूरे दिन जारी रही। दुकानों पर महिलाओं की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिली। पूजन सामग्री की खरीदारी हो रही है। पसहर चावल, छह प्रकार की भाजियां, भैंस के दूध-दही, फल-फूल और पारंपरिक सामग्री की डिमांड रही। कमरछठ पर्व पर महिलाएं निर्जला व्रत रखकर भगवान बलराम और माता षष्ठी की पूजा-अर्चना करेंगी। घरों और पूजा स्थलों पर विशेष सजावट की जा रही है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस पर्व को लेकर उत्साह का माहौल है। व्यापारियों का कहना है कि पर्व के चलते पूजा सामग्री की बिक्री में बढ़ोतरी हुई है। मंगलवार सुबह से महिलाएं तालाबों, मंदिरों और घरों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना कर संतान की सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना करेंगी।
संतान की दीर्घायु की कामना के साथ माताएं रखेंगी व्रत, होगी सगरी की पूजा
कल माताएं संतान की दीर्घायु हेतु हलषष्ठी की व्रत रखकर सगरी की पूजा अर्चना करेगी और प्रसाद स्वरुप पसहर चावल ग्रहण किया जाएगा। बता दे कि पूजा अर्चना में बिना हल जोते उगने वाले पसहर चावल व छह प्रकार के भाजियों का भोग लगाने की परम्परा है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से संतान के सभी कष्ट दूर होते है। माताओं के अतिरिक्त नवविवाहित स्त्रियां भी संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती है। शहर सहित जिले भर के विभिन्न स्थानों पर पूजा हेतु सगरी के लिए छोटा गड्ढा खोदकर तालाब बनाकर कांशी और पलाश के पेड़ लगाए जाएगें। पूजा अर्चना के पश्चात महिलाओं द्वारा कमरछठ की कथा सुनाई जाएगी। बता दे कि कमरछठ व्रत में भैंस के दूध, दही का ही उपयोग किया जाता है। पूजा पश्चात माताओं द्वारा बच्चों को तिलक लगाकर कंधे के पास पोतनी लगाकर आशीर्वाद दिया जाता है।


