शिक्षक ज्ञान के दीपक, संस्कारों से करते हैं जीवन का निर्माण : साध्वीश्री
शिक्षक दिवस पर श्री पार्श्वनाथ जिनालय में गूंजा ज्ञान, संस्कार और आत्मजागरण का संदेश

धमतरी। इतवारी बाजार स्थित श्री पार्श्वनाथ जिनालय में चातुर्मास के पावन अवसर पर परम पूज्य प्रवर्तनी महोदया कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका निपूर्णा श्री जी महाराज साहेब की सुशिष्या, प्रवचन प्रवीणा परम पूज्य स्नेहयशा श्री जी महाराज साहेब की अंतेवासिनी परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी महाराज साहेब आदि ठाणा-4 का पावन सानिध्य श्रद्धालुओं को प्राप्त हो रहा है। उनके सानिध्य में प्रतिदिन धर्मसभा, मंगल प्रवचन एवं विभिन्न धार्मिक आयोजन श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ संपन्न हो रहे हैं।
शिक्षक दिवस के विशेष अवसर पर आयोजित धर्मसभा में साध्वीश्री ने शिक्षक के महत्व को जैन दर्शन से जोड़ते हुए ज्ञान, संस्कार, संयम और सदाचार का प्रेरणादायी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पुस्तकीय ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह विद्यार्थी के जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है। शिक्षक अपने ज्ञान और अनुभव से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का निर्माण करता है और उन्हें अच्छे संस्कारों के साथ जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
साध्वीश्री ने कहा कि ज्ञान मनुष्य को विवेक प्रदान करता है, जबकि संस्कार उसके व्यक्तित्व को श्रेष्ठ बनाते हैं। जैन दर्शन में ज्ञान के साथ आचरण और आत्मशुद्धि को विशेष महत्व दिया गया है। यदि शिक्षा के साथ अहिंसा, सत्य, करुणा, क्षमा, संयम और विनम्रता जैसे गुण जीवन में उतर जाएं, तो शिक्षा वास्तव में सार्थक हो जाती है।
उन्होंने कहा कि आज विद्यार्थी आधुनिक शिक्षा के माध्यम से बहुत कुछ सीख रहे हैं, लेकिन जीवन की सफलता केवल ज्ञान और डिग्री से नहीं मिलती। अच्छे विचार, श्रेष्ठ आचरण और संस्कार ही मनुष्य को समाज में सम्मान और जीवन में सच्ची शांति प्रदान करते हैं।
सच्चा गुरु अज्ञान का अंधकार दूर करता है
साध्वीश्री ने कहा कि जीवन में अनेक शिक्षक हमें अलग-अलग विषयों का ज्ञान देते हैं, लेकिन सच्चा गुरु वह है जो मनुष्य को अपने भीतर झांकने और आत्मचिंतन करने की प्रेरणा देता है। मनुष्य के भीतर मौजूद क्रोध, अहंकार, लोभ और मोह जैसे विकारों को दूर करने की दिशा दिखाना ही गुरु की सबसे बड़ी देन है।
उन्होंने कहा कि गुरु की सीख केवल सुनने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। गुरु के बताए मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्चा सम्मान है। विद्यार्थी यदि अपने शिक्षकों के संस्कारों को जीवन में उतारकर अच्छे नागरिक बनें, तो यही शिक्षक के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।
शिक्षक का सम्मान जीवनभर होना चाहिए
साध्वीश्री ने कहा कि शिक्षक दिवस केवल एक दिन गुरुजनों को शुभकामनाएं देने का अवसर नहीं, बल्कि उनके योगदान को स्मरण करने का दिन है। शिक्षक का वास्तविक सम्मान अनुशासन, अच्छे व्यवहार, मेहनत और श्रेष्ठ चरित्र के माध्यम से किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एक शिक्षक एक विद्यार्थी को शिक्षित करता है, लेकिन वही विद्यार्थी आगे चलकर परिवार और समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाता है। इस प्रकार एक शिक्षक वास्तव में पूरी पीढ़ी के भविष्य को आकार देने का कार्य करता है।
धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे और साध्वीश्री के मंगल प्रवचन का श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया। जिनालय परिसर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।