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जब हमारे हृदय में भी समस्त जीवों के प्रति करुणा का भाव आ जाएगा हम भी परमात्मा बनने की योग्यता प्राप्त कर लेंगे – परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी


धमतरी। परम पूज्य प्रवर्तनी महोदया कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका निपूर्णा श्री जी महाराज साहेब की सुशिष्या प्रवचन प्रवीणा परम पूज्य स्नेहयशा श्री जी महाराज साहेब की अंतेवासिनी परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी महाराज साहेब आदि ठाणा 4 का धर्मनगरी धमतरी के श्री पाश्र्वनाथ जिनालय इतवारी बाजार में चातुर्मास हेतु विराजित है। परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी महाराज साहेब ने आज के प्रवचन के माध्यम से फरमाया कि आज पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व का दूसरा दिन है। हर दिन की तरह आज का दिन भी एक नया सूरज लेकर आया है। आज के दिन हमे चिंतन करना है कि जो कल बीत गया उसका हमने किस तरह सदुपयोग किया। और आज का दिन किस तरह व्यतीत करना है, जिससे की आने वाला भव सुधर सके। इन पर्व के दिनों का एक एक क्षण अमूल्य है। क्योंकि ये एक एक क्षण हमे संसारी से सिद्ध बनाने की क्षमता रखता है। आज के दिन जिन प्रतिमा का महत्व बताया जाता है। पत्थर की मूरत में हमे अगर भगवान दिखाई न दे तो समझ जाना चाहिए कि हमारा हृदय पत्थर का है। क्योंकि कोमल हृदय वाले को ही परमात्मा का दर्शन हो सकता है। परमात्मा तो करुणा के भंडार होते है। उनके हृदय में संसार के समस्त जीव के प्रति करुणा का भाव होता है। जिस दिन हमारे हृदय में भी समस्त जीवों के प्रति करुणा का भाव आ जाएगा । हम भी परमात्मा बनने की योग्यता को प्राप्त कर लेंगे।
प्रत्येक श्रावक को प्रतिदिन 5 कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।
पौषध व्रत- जीवन में पौषध का विशेष महत्व होता है। साधु साध्वी आजीवन पौषध में ही रहते है। लेकिन हमे भी समय समय पर अर्थात पर्व तिथियों में पौषध लेकर साधु जीवन का अहसास प्राप्त करना चाहिए। पर्व के दिनों के पौषध करने से विशेष लाभ होता है। पौषध हमारे जीवन में अनुशासन लाता है। पौषध के समय हमारे मन में संसार के प्रति असारता का भाव आना चाहिए।

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