Uncategorized

सत्संग केवल सुनना नहीं, जीवन में उतारना जरूरी : साईं कृष्ण लाल दास जी

झूलेलाल चालीसा महोत्सव में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, संत वचनों से भक्तों को दिया आत्मचिंतन और भक्ति का संदेश


धमतरी। कोष्टा पारा स्थित श्री झूलेलाल मंदिर में सिंधी समाज के इष्टदेव भगवान श्री झूलेलाल जी का चालीसा महोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। 9 अगस्त से प्रारंभ हुए चालीसा महोत्सव के दौरान प्रतिदिन सुबह-शाम विशेष पूजा-अर्चना, आरती, पल्लव एवं अरदास का आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव के पांचवें मंगलवार को चकरभाटा से पधारे साईं कृष्ण लाल दास जी ने झूलेलाल प्रांगण में सत्संग एवं भक्ति कार्यक्रम के माध्यम से श्रद्धालुओं को जीवन में सत्य, सेवा, भक्ति और सद्कर्मों का महत्व बताया। साईं कृष्ण लाल दास जी ने कहा कि संसार में अधिकांश चीजें सरलता से प्राप्त हो जाती हैं, लेकिन संतों का संग और सत्संग बड़ी दुर्लभ चीजें हैं। किसी भी महफिल में बैठना सत्संग नहीं है, बल्कि जहां सत्य का बोध कराया जाए और जीवन को सही दिशा देने वाले विचार मिलें, वही वास्तविक सत्संग है। उन्होंने कहा कि कलियुग में सत्संग और संतों का संग मनुष्य के जीवन को बदलने की शक्ति रखते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि भक्ति उमंग और उत्साह का विषय है, लेकिन केवल सत्संग सुन लेना पर्याप्त नहीं है। सत्संग के वचनों को अपने जीवन में उतारने और उन पर अमल करने से ही उसका वास्तविक लाभ मिलता है। सत्य और भ्रम का अंतर समझना जरूरी है। मंगलवार के प्रभारी मनीष जेठवानी की अगुवाई में कार्यक्रम संपन्न हुआ। सत्संग के पश्चात सिंधी समाज सहित सर्व समाज के लिए लंगर प्रसादी का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!