सेवा संकल्प अभियान से बदली लेखराम की जिंदगी, व्हीलचेयर से वॉकर के सहारे घर लौटे
निदान-03 शिविर में मिला सहारा, अब आत्मनिर्भर होकर चलने की जगी उम्मीद

धमतरी- सेवा संकल्प अभियान जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है। इसी कड़ी में धमतरी जिले के मगरलोड विकासखंड के ग्राम भेंडरी निवासी लेखराम साहू के जीवन में भी उम्मीद की नई किरण जगी है। बाइक से गिरने के कारण दोनों पैरों में सुन्नपन आने के बाद व्हीलचेयर पर निर्भर हो चुके लेखराम अब वॉकर के सहारे चलने की उम्मीद के साथ घर लौटे।
लेखराम साहू बाइक से गिरने के बाद अपने दोनों पैरों में सुन्नपन की समस्या से जूझने लगे थे। इस परेशानी के कारण उनके लिए सामान्य रूप से चलना-फिरना मुश्किल हो गया और उन्हें आने-जाने के लिए व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ता था। रोजमर्रा के कामों के लिए दूसरों पर निर्भरता उनकी मजबूरी बन गई थी। ऐसे में ‘निदान-03’ विशेष शिविर उनके लिए राहत और नई उम्मीद लेकर आया।
धमतरी के इंडोर स्टेडियम में आयोजित तीन दिवसीय जिला स्तरीय शिविर के अंतिम दिन लेखराम साहू व्हीलचेयर पर पहुंचे। यहां उन्हें वॉकर उपलब्ध कराया गया। वॉकर का सहारा मिलने पर उनके चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। शिविर में व्हीलचेयर पर आए लेखराम जब वॉकर के सहारे चलकर घर लौटे, तो यह उनके लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाला भावुक क्षण बन गया।
सहायक उपकरण से बढ़ेगा आत्मविश्वास
लेखराम साहू को मिला वॉकर उनके लिए केवल एक सहायक उपकरण नहीं, बल्कि अपनी दैनिक गतिविधियों को अधिक सहज बनाने और आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। अब उन्हें उम्मीद है कि वे वॉकर के सहारे अपनी जरूरत के काम करने और आवागमन में पहले से अधिक सहजता महसूस कर सकेंगे।
जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग तथा भगवान महावीर दिव्यांग सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘निदान-03’ शिविर का उद्देश्य दिव्यांगजनों को आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराकर उनके जीवन को सुगम बनाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। शिविर में कृत्रिम अंग, कैलिपर्स, व्हीलचेयर, वॉकर एवं अन्य सहायक उपकरणों के साथ दिव्यांगता प्रमाण पत्र, विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र (यूडीआईडी) तथा बस पास जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित यह शिविर इस बात का उदाहरण है कि समय पर सहायता और जरूरत के अनुरूप सहायक उपकरण मिलने से दिव्यांगजनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। लेखराम साहू की कहानी भी इसी उम्मीद को मजबूत करती है कि उचित सहयोग से मुश्किल परिस्थितियों में भी आत्मनिर्भरता की नई राह बनाई जा सकती है।