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धमतरी की ऐतिहासिक वनोपज मंडी फिर हुई गुलजार, हर सोमवार लगेगी बोली

वनोपज और औषधीय उत्पादों को मिलेगा स्थानीय बाजार, किसानों-संग्राहकों की बढ़ेगी आय की संभावनाएं

पूर्व विधायक रंजना साहू ने किया नियमित क्रय-विक्रय का शुभारंभ
पांच स्व-सहायता समूहों को मिले 25-25 हजार के प्रोत्साहन चेक

धमतरी- धमतरी की व्यापारिक विरासत और वनांचल की समृद्ध प्राकृतिक संपदा से जुड़ी दशकों पुरानी वनोपज मंडी आज फिर गुलजार हो उठी। श्यामतराई स्थित कृषि उपज मंडी परिसर में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत वनोपज एवं अन्य औषधीय उत्पादों के नियमित क्रय-विक्रय का शुभारंभ पूर्व विधायक श्रीमती रंजना साहू ने किया। अब प्रत्येक सोमवार को यहां वनोपज की खरीदी-बिक्री के लिए मंडी सजेगी और खुली बोली के माध्यम से उत्पादकों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
यह पहल केवल एक मंडी को दोबारा शुरू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वनांचल के किसानों, वनोपज संग्राहकों, छोटे व्यापारियों और स्थानीय उद्यमियों को बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। स्थानीय स्तर पर खरीदी-बिक्री की सुविधा मिलने से उत्पादकों को दूरस्थ बाजारों पर निर्भरता कम करने, परिवहन खर्च बचाने और अपनी उपज के विपणन के लिए एक नियमित मंच उपलब्ध होने की उम्मीद है।
शुभारंभ अवसर पर 8 कृषकों अपने उत्पाद मंडी में बेचने लाए। जिनमें सुमन साहू, और मोतीराम देवांगन,अश्वगंधा,सखाराम नेताम, काल मेष,भारत नेताम,और अशोक सिन्हा, कपिल देवसी, हर्रा, साहिल निषाद,गिलोय, ने आज शुभारभ के अवसर पर वनोपज बोली द्वारा बिक्री किए । अतिथियों की उपस्थिति में बोली लगाकर वनोपज की खरीदी-बिक्री की गई। इससे मंडी में प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य निर्धारण और नियमित व्यापार की संभावनाओं को प्रोत्साहन मिला।

वनोपज का उचित मूल्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्राथमिकता : रंजना साहू

पूर्व विधायक श्रीमती रंजना साहू ने अपने उद्बोधन में कहा कि धमतरी की पुरानी वनोपज मंडी का पुनः संचालन जिले की व्यापारिक परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ-साथ किसानों और वनोपज संग्राहकों के हित में महत्वपूर्ण पहल है। वनांचल के अनेक परिवार अपनी आजीविका के लिए लघु वनोपज एवं प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर हैं। ऐसे में उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए स्थानीय स्तर पर नियमित बाजार मिलना आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में उपयोगी कदम है।
उन्होंने कहा कि राज्य शासन किसानों, ग्रामीण परिवारों और वन आधारित आजीविका से जुड़े लोगों के हित में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कृषि उत्पादन, वनोपज संग्रहण, प्रसंस्करण, विपणन और स्वरोजगार को प्रोत्साहित कर रहा है। समर्थन मूल्य पर अधिसूचित लघु वनोपज की खरीदी, वन धन विकास केंद्रों के माध्यम से संग्रहण एवं मूल्य संवर्धन तथा महिला स्व-सहायता समूहों की आजीविका गतिविधियां इस क्षेत्र में नए अवसर विकसित करने में सहायक हो सकती हैं। योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के साथ स्थानीय बाजारों को मजबूत करना भी आवश्यक है।
श्रीमती साहू ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, कृषि अवसंरचना निधि और किसान उत्पादक संगठनों को प्रोत्साहन जैसी पहलों के माध्यम से किसानों की आय, कृषि सुविधाओं और बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इन योजनाओं के साथ स्थानीय स्तर पर खरीदी-बिक्री, भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन की सुविधाएं विकसित हों, तो किसानों एवं संग्राहकों को अपनी मेहनत का बेहतर प्रतिफल प्राप्त करने के अवसर मिल सकते हैं।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि श्यामतराई मंडी के नियमित संचालन से धमतरी सहित आसपास के वनांचल क्षेत्रों के उत्पादकों को लाभ मिलेगा। उन्होंने व्यापारियों से किसानों एवं संग्राहकों द्वारा लाई गई उपज की खरीदी में सक्रिय भागीदारी निभाने तथा अधिक से अधिक उत्पादकों को मंडी से जोड़ने की अपील की।

कच्ची वनोपज से मूल्य संवर्धन तक विकसित होगी पूरी श्रृंखला : कलेक्टर

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि ऐतिहासिक वनोपज मंडी को पुनः सक्रिय करने का उद्देश्य जिले के कृषकों और वनोपज संग्राहकों को स्थानीय स्तर पर बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है। प्रत्येक सप्ताह नियमित क्रय-विक्रय की व्यवस्था बनने से उत्पादकों को अपनी उपज बेचने के लिए दूरस्थ बाजारों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। इससे समय और परिवहन लागत की बचत के साथ विपणन की प्रक्रिया भी अधिक सुविधाजनक हो सकेगी।
उन्होंने कहा कि धमतरी में वनोपज एवं औषधीय उत्पादों के प्रसंस्करण, पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन की व्यापक संभावनाएं हैं। आवश्यकता इस बात की है कि वन क्षेत्र से प्राप्त होने वाले उत्पाद केवल कच्चे रूप में बाहर न जाएं, बल्कि उनके संग्रहण से लेकर प्रसंस्करण और विपणन तक की गतिविधियां स्थानीय स्तर पर विकसित हों। इससे वनोपज पर निर्भर परिवारों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ युवाओं, महिला समूहों और स्थानीय उद्यमियों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित हो सकते हैं।
कलेक्टर ने कहा कि मंडी को नियमित रूप से संचालित करने के साथ अधिक से अधिक उत्पादकों को इससे जोड़ना, व्यापारियों की भागीदारी बढ़ाना और स्थानीय उत्पादों के लिए बाजार की संभावनाओं को विस्तार देना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।

पांच स्व-सहायता समूहों को मिले 25-25 हजार के प्रोत्साहन चेक

कार्यक्रम में कृषि सुधार विस्तार कार्यक्रम के अंतर्गत पांच स्व-सहायता समूहों को 25-25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि के चेक वितरित किए गए। इसके साथ ही व्यक्तिगत कृषकों को भी सम्मानित किया गया। समूहों को दी गई प्रोत्साहन राशि का उद्देश्य उनकी आजीविका गतिविधियों को आगे बढ़ाने और सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करने से जुड़ा है। महिला समूहों एवं ग्रामीण उत्पादकों की सक्रिय भागीदारी से स्थानीय स्तर पर उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन की संभावनाओं को गति मिल सकती है।

हर सोमवार सुबह 10 बजे से होगी खरीदी-बिक्री

कृषि उपज मंडी समिति धमतरी द्वारा प्रत्येक सोमवार को सुबह 10 बजे से कार्य समाप्ति तक श्यामतराई मंडी परिसर के शेड क्रमांक-01 में पोल क्रमांक 04 से 08 तक का हिस्सा वनोपज एवं अन्य औषधीय उत्पादों के क्रय-विक्रय के लिए आरक्षित किया गया है। कृषक एवं वनोपज संग्राहक अपनी उपज लेकर निर्धारित स्थल पर पहुंच सकते हैं।

वनमंडलाधिकारी श्री श्रीकृष्णा जाधव ने जिले में उपलब्ध वनोपज और वन संपदा की संभावनाओं की जानकारी दी। जिला लघु वनोपज व्यापारी संघ के अध्यक्ष श्री इस्तियाक रोकड़िया तथा श्री सत्यनारायण राठी ने भी अपने विचार रखे।

धमतरी का श्यामतराई क्षेत्र लंबे समय से वनोपज व्यापार से जुड़ा रहा है। वनांचल और मैदानी क्षेत्रों के बीच स्थित होने के कारण यह क्षेत्र स्थानीय उत्पादों के व्यापार के लिए महत्वपूर्ण स्थान रखता है। पहले अनेक उत्पादकों और व्यापारियों को वनोपज एवं औषधीय उत्पादों के कारोबार के लिए बस्तर और जगदलपुर जैसे केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ता था। अब नियमित मंडी सुविधा से स्थानीय स्तर पर व्यापार को बढ़ावा मिलने की संभावनाएं हैं।

ऐतिहासिक वनोपज मंडी का पुनः संचालन धमतरी की पुरानी व्यापारिक पहचान को नया विस्तार देने के साथ वन आधारित आजीविका, ग्रामीण उद्यमिता और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक नई शुरुआत है। आने वाले समय में यह पहल संग्रहण से खरीदी-बिक्री, प्रसंस्करण से मूल्य संवर्धन और स्थानीय उत्पादों से नए रोजगार तक की संभावनाओं को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मंच बन सकती है।

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