छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति और कला की शानदार प्रस्तुति से सजी भखारा मे सांस्कृतिक संध्या

नगर पंचायत अध्यक्ष ज्योति हरख जैन ने की राग अनुराग कला मंच की सराहना, लोक कलाकारों को बताया छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का संवाहक
भखारा। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला, संस्कृति, परंपरा और संगीत को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से विधायक अजय चंद्राकर द्वारा दुर्ग छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध राग अनुराग कला मंच द्वारा शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति कराई गई। मंच के कलाकारों ने अपने मधुर छत्तीसगढ़ी गीतों, संगीत और मनमोहक मंचीय प्रस्तुतियों से उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती ज्योति हरख जैन उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ की लोककला और संस्कृति हमारी पहचान एवं गौरव है। ऐसे सांस्कृतिक मंच हमारी परंपराओं, लोकगीतों और क्षेत्रीय भाषा को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कलाकार अपनी प्रतिभा और साधना के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचा रहे हैं। उन्होंने राग अनुराग कला मंच के सभी कलाकारों के प्रयासों की सराहना करते हुए शुभकामनाएँ दीं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जनपद पंचायत कुरूद की अध्यक्ष श्रीमती गितेश्वरी साहू ने की। उन्होंने भी अपने उद्बोधन में लोककला एवं सांस्कृतिक आयोजनों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में रामगोपाल देवांगन पूर्व जनपद अध्यक्ष, पूजा सिन्हा जिला पंचायत सदस्य, आनंद यदु भाजपा जिला उपाध्यक्ष, छात्रपाल बैस, रामस्वरूप साहू, पूर्णिमा साहू आदि सहित नगर पंचायत उपाध्यक्ष विष्णु साहू एवं अन्य जनप्रतिनिधि गण पार्षद गण, एल्डरमैन, बस्ती पंचायत अध्यक्ष गण उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि राग अनुराग कला मंच, दुर्ग छत्तीसगढ़ अपने उत्कृष्ट छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक कार्यक्रमों, लोकगीतों और मंचीय प्रस्तुतियों के लिए जाना जाता है। मंच के संचालक हेमलाल कौशल हैं तथा गीतकार एवं संगीतकार नवीन देशमुख हैं। मंच द्वारा ‘हाय रे तोर सुरता’, ‘माया के डोरी’, ‘ते कहा लाए’, ‘झूलना झुलाहू’ एवं ‘संगवारी रे माया बंध’ जैसे लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति को सुंदर अभिव्यक्ति दी जाती है। कार्यक्रम रात 3 तक चला।कार्यक्रम ने दर्शकों के बीच छत्तीसगढ़ी कला, संगीत और सांस्कृतिक विरासत के प्रति उत्साह एवं अपनत्व का वातावरण निर्मित किया।
