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धमतरी में एडवेंचर टूरिज्म को नई उड़ान, सटियारा में शुरू हुई रॉ कैंपिंग की पहल

गंगरेल बांध के आसपास के डूबान क्षेत्रों में पर्यटन विकास की व्यापक संभावनाएं; सटियारा के बाद हरफर और कोलियारी में भी पर्यटन गतिविधियों के विस्तार की तैयारी

धमतरी- गंगरेल बांध का विशाल जलक्षेत्र, हरे-भरे वन, पहाड़ियां और ग्रामीण अंचलों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत धमतरी जिले को प्रकृति एवं एडवेंचर टूरिज्म के लिए विशिष्ट पहचान दिलाने की क्षमता रखते हैं। इन संभावनाओं को पर्यटन गतिविधियों में बदलने की दिशा में जिले के सटियारा गांव में रॉ कैंपिंग की पहल की गई है। कैंपिंग एवं पर्यटन कंपनी कैंपवन्स द्वारा आयोजित दो दिवसीय, एक रात्रि के शिविर में रायपुर, भिलाई और बिलासपुर से पहुंचे पर्यटकों ने प्रकृति के बीच समय बिताने के साथ ग्रामीण जीवन और स्थानीय संस्कृति को करीब से जाना। इस पहल के साथ गंगरेल बांध के आसपास के अन्य संभावनाशील क्षेत्रों में भी पर्यटन गतिविधियों के विस्तार की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा पर्यटन विकास और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में राज्य की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़े पर्यटन स्थलों को प्रोत्साहित करने के प्रयासों के बीच धमतरी जिले में भी पर्यटन की संभावनाओं को व्यवस्थित स्वरूप देने की पहल की जा रही है।

सटियारा में प्रकृति के बीच कैंपिंग का अनूठा अनुभव

सटियारा में आयोजित रॉ कैंपिंग शिविर में पर्यटकों को पारंपरिक पर्यटन से अलग प्रकृति के बीच ठहरने और ग्रामीण परिवेश को समझने का अवसर मिला। शिविर के दौरान टेंट में रात्रि विश्राम, जंगल में ट्रेकिंग, बोटिंग, अलाव के आसपास सामूहिक गतिविधियों और कहानी-कथन जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं। आयोजन में भोजन, सुरक्षा और आवश्यक सुविधाओं के लिए टीम की व्यवस्था भी रही।
शिविर में शामिल पर्यटकों ने गांव के लोगों से संवाद किया। ग्रामीणों ने आत्मीयता के साथ पर्यटकों को सीताफल भेंट किए। पर्यटकों ने बच्चों और बुजुर्गों के साथ समय बिताया तथा ग्रामीण जीवन की सादगी, आपसी आत्मीयता और स्थानीय संस्कृति को करीब से अनुभव किया। इस पहल ने प्रकृति आधारित पर्यटन के साथ शहरों और गांवों के बीच सांस्कृतिक संवाद की संभावनाओं को भी सामने रखा।

सटियारा के बाद हरफर और कोलियारी में भी पर्यटन विकास की तैयारी

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने बताया कि सटियारा को कैंपिंग साइट के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। गंगरेल बांध के आसपास के डूबान क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार की व्यापक संभावनाएं हैं। इन्हें ध्यान में रखते हुए हरफर, कोलियारी सहित अन्य उपयुक्त क्षेत्रों में भी पर्यटन सुविधाएं विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि कोलियारी क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को व्यवस्थित स्वरूप देने और पर्यटन समिति के गठन की पहल की जा रही है। यहां बोटिंग विलेज की अवधारणा के अनुरूप विकास की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। इससे जल आधारित पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय प्राकृतिक परिवेश के अनुरूप पर्यटकों के लिए नए अनुभव विकसित किए जा सकेंगे।
कलेक्टर ने कहा कि पर्यटन विकास के लिए राज्य शासन और छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल का सहयोग महत्वपूर्ण है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि पर्यटन स्थलों की प्राकृतिक विशेषताओं को सुरक्षित रखते हुए आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जाए और स्थानीय समुदायों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की संभावनाओं को आगे बढ़ाया जाए।

बेहतर पहुंच मार्ग और बुनियादी सुविधाओं पर जोर

पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों की सुगम पहुंच और सुविधाजनक ठहराव के लिए सड़क संपर्क, संकेतक बोर्ड, पार्किंग, स्वच्छता, पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं महत्वपूर्ण हैं। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के साथ संबंधित क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार पहुंच मार्गों के सुधार और आधारभूत सुविधाओं के विकास की जरूरत पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
गंगरेल बांध और आसपास के क्षेत्रों में बोटिंग, कैंपिंग एवं ट्रेकिंग जैसी गतिविधियों को संचालित करते समय सुरक्षा, आवश्यक अनुमतियों और पर्यावरणीय मानकों का पालन जरूरी होगा। योजनाबद्ध विकास से पर्यटकों की सुविधा बढ़ाने के साथ स्थानीय व्यवसायों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।

ग्रामीण युवाओं और स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार की संभावनाएं

कैंपिंग, ट्रेकिंग और ग्रामीण पर्यटन के विस्तार से स्थानीय युवाओं को गाइड, परिवहन, भोजन व्यवस्था तथा अन्य पर्यटन सेवाओं से जोड़ने की संभावनाएं हैं। ग्रामीण अपने स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक व्यंजनों और सांस्कृतिक विशेषताओं को पर्यटकों तक पहुंचाकर अतिरिक्त आय के अवसर भी प्राप्त कर सकते हैं।

इसके लिए स्थानीय ग्राम समितियों की भागीदारी, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और कचरा प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण रहेंगी। पर्यटन गतिविधियों को पर्यावरण के अनुकूल स्वरूप देने और उनके आर्थिक लाभ स्थानीय समुदायों तक पहुंचाने से ग्रामीण पर्यटन को टिकाऊ आधार मिल सकता है।

प्रकृति और रोमांच पर्यटन के लिए उभरता धमतरी

सटियारा में रॉ कैंपिंग की पहल तथा हरफर और कोलियारी जैसे क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार की तैयारी धमतरी जिले में प्रकृति आधारित पर्यटन की नई संभावनाओं को रेखांकित करती है। गंगरेल बांध का प्राकृतिक परिवेश, जलाशय और आसपास के ग्रामीण अंचल पर्यटकों को प्रकृति, रोमांच और स्थानीय संस्कृति से जोड़ने के अवसर प्रदान करते हैं।

राज्य शासन, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल और जिला प्रशासन के समन्वय से योजनाबद्ध पर्यटन विकास, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार तथा स्थानीय समुदायों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन प्रयासों से धमतरी को छत्तीसगढ़ के प्रमुख प्रकृति एवं एडवेंचर टूरिज्म गंतव्यों में स्थापित करने और स्थानीय आजीविका के नए अवसर सृजित करने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।

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