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धान खरीदी में आई तेजी, लगभग 28 लाख क्विंटल की हुई खरीदी

आनलाईन लिंकिंग के माध्यम से किसानो ंसे वसूला गया 152 करोड़ का कर्ज

धमतरी। जिले में धान खरीदी में तेजी आ रही है। पहले की तुलना में रोजाना अब डेढ़ गुणा धान की आवक केन्द्रो में हो रही है। राज्य सरकार द्वारा प्रति क्विंटल इकत्तीस सौ रुपये समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की घोषणा को पूरा किये जाने के बाद उपार्जन केन्द्रों में धान के आवक में काफी वृद्धि हुई है। पहले तक जहां सत्तर से अस्सी हजार क्विंटल धान खरीदी केन्द्रों में पहुंच रहा था, वहीं अब सवा लाख क्विंटल से अधिक धान की आवक केन्द्रों में हो रही है। शुक्रवार शाम तक धमतरी जिले में 27 लाख 79 हजार 717 क्विंटल धान की खरीदी समर्थन मूल्य पर हो चुकी थी। कुरुद शाखा के उपार्जन केन्द्रों में 268120 क्विंटल,धमतरी शाखा में 420062 क्विंटल, दरबा में 12347 क्विंटल, नारी में 85613 क्विंटल, भखारा में 209290 क्विंटल, कोर्रा में 246692 क्विंटल, नगरी में 529936 क्विंटल, करेली में 160317 क्विंटल, मगरलोड में 364787 क्विंटल, संबलपुर में 238776 क्विंटल तथा मरौद में 132667 क्विंटल धान खरीदी किया गया है। वहीं किसानों से लिंकिंग के रुप में 151 करोड़ 44 लाख 72 हजार रुपये कर्ज वसूला गया है।


गौरतलब है कि पूर्व में राज्य सरकार द्वारा 25 सौ रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से किसानों का धान समर्थन मूल्य पर खरीदा जा रहा था। भाजपा ने सरकार बनाने पर प्रति एकड़ 21 सौ क्विंटल धान प्रति क्विंटल 31 सौ रुपये पर खरीदी करने का वादा किया था। चुनावी वादे के चलते ज्यादातर किसान अपने धान की बिक्री करने उपार्जन केन्द्रों में नहीं पहुंच रहे थे। धमतरी जिले के 100 उपार्जन केन्द्रों में प्रतिदिन लगभग 70 से 80 हजार क्विंटल धान की ही आवक हो रही थी। इधर चुनावी नतीजे आने और राज्य में भाजपा की सरकार बनाने के बाद किसानों को पूर्व में किये गये वादे के पूरा होने का इंतजार था। आखिरकार राज्य के नये मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कुछ दिन पहले ही किसानों से किये गए वादे को पूरा करते हुए वर्तमान सीजन से ही 31 सौ रुपये प्रति क्विंटल में धान खरीदी करने की घोषणा कर दिया। जैसे ही सरकार ने अपना वादा पूरा किया वैसे ही उपार्जन केन्द्रों में किसानों की भीड़ भी बढऩे लगी है। पिछले तीन-चार दिनों से उपार्जन केन्द्रों में धान के आवक में काफी इजाफा हुआ है। रोजाना सवा लाख क्विंटल से भी अधिक धान की खरीदी उपार्जन केन्द्रों में हो रही है।

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