झूलेलाल चालीसा महोत्सव की हुई शुरुआत, अखंड ज्योत प्रचलित कर शुरू हुआ 40 दिन का पर्व

प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी धमतरी सिन्धी समाज द्वारा अपने ईष्ट भगवान झूलेलाल साईं का चालीहा साहिब महोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है. शहर के कोष्टापारा स्थित झूलेलाल मंदिर में सुबह 10 बजे समाज के भाई साहबों के सानिध्य में झूलेलाल जी की अखंड ज्योत प्रचलित की गई. जो झूलेलाल सांई के समक्ष 40 दिन तक प्रचलित होती रहेगी । बाद इसके भाई साहब और संतों की मौजूदगी में आरती पल्लव अरदास कर देश प्रदेश में सुख समृद्धि, अच्छी वर्षा की कामना की गई । इस आयोजन में समाज के प्रमुख सहित समाज के सभी वर्ग के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे । इस मर्तबा चालीहा साहिब महोत्सव 31 जुलाई से शुरू हो पूरे 40 दिन होते हुए 8 सितंबर तक इस महोत्सव का आयोजन चलता रहेगा । इस दौरान रोजाना झूलेलाल मंदिर में सुबह 9.30 से 10.30 और रात्रि को 9:30 से 10:30 बजे तक सांई झूलेलाल जी की चालीसा पाठ, अखो, पंजड़ा,,आरती, पल्लव, अरदास, भजन, कीर्तन सहित कई सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं भी झुलेलाल मंडल परिवार द्वारा आयोजित की जा रही है । झूलेलाल मंडल के सेवक राजू भोजवानी ने बताया कि धमतरी जिले में 31 जुलाई से चालीहा साहिब महोत्सव शूरू हुआ है, चालीहा साहिब महोत्सव सिंधी समाज का सबसे बड़ा पर्व है । चालीहा महोत्सव 40 दिन तक चलता है इस बार 31 जुलाई से शुरू होने वाला चालीहा साहिब महोत्सव 8 सितंबर तक चलेगा । भगवान झूलेलाल सिंधियों के इष्ट देवता है, इस दौरान सिंधी समाज के लोग भगवान झूलेलाल की विशेष पूजा अर्चना करते हैं । चालीहा साहिब महोत्सव के दौरान मंदिरों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं ।
*चालीहा महोत्सव की पौराणिक कथा*
समाज के मीडिया प्रभारी राजेश चावला ने बताया की पौराणिक कथाओं के अनुसार अत्याचारी शासक मिरक शाह के अत्याचारों से प्रजा को बचाने के लिए भगवान झूलेलाल ने वरुणदेव का अवतार लिया था. शासक मिरक शाह अपनी प्रजा पर बर्बरता करता. उन पर अत्याचार करता था. इससे मुक्ति पाने के लिए लोगों ने सिंधू नदी के तट पर 40 दिन तक पूजा पाठ, जप , व्रत,आदि किए थे.
इससे प्रभावित होकर मछली ( पल्ले पर सवार ) भगवान झूलेलाल प्रकट हुए और उन्होंने भक्तो से कहा कि वह धर्म की रक्षा हेतु सिंध के नसर पुर के रत्न राय देवकी माता के घर बालक के रूप में अवतरित होंगे. चैत्र सुदी दूज पर उनके बताएं स्थान पर एक बच्चे के रुप में अवतरित हुवे. उस बच्चे का नाम उदय रखा गया. उसकी लीला के कारण उसका नाम झूलेलाल सांई रखा गया ।
*कैसे मनाया जाता है चालीहा महोत्सव*
झूलेलाल मंडल के सेवाधारी अशोक बुधवानी ने बताया की कथाओं के अनुसार भगवान झूलेलाल इन दोनों वरुण देवता के रूप में साक्षात हाजिर रहते हैं और भक्तों को आशीर्वाद देते हैं चालीहा महोत्सव 40 दिन का पर्व है इन 40 दिन तक भगवान झूलेलाल की विशेष पूजा अर्चना की जाती है मंदिरों में विशेष अखंड ज्योत जलाई जाती है और हर शुक्रवार को भगवान का अभिषेक किया जाता है साथ ही हर मंगलवार विशेष आमंत्रित संतो द्वारा सत्संगी का आयोजन किया जा रहा , इस दौरान सिंधी समाज के लोग व्रत, उपवास रखते हैं . सुबह-शाम मन्दिर में भगवान की कथा सुनते हैं. कहा जाता है कि जो भी भक्त 40 दिन सच्चे मन से भगवान झूलेलाल की पूजा करता है उसके सभी कष्ट दूर होते हैं ।
*आयोजन में रहे मुख्य रूप से शामिल*
चालीहा महोत्सव की शुरुआत आयोजन में झूलेलाल मंडल के वरिष्ठ भगवानदास चावला, जय रामदास,डॉक्टर खेमचंद भोजवानी अशोक बुधवानी झूलेलाल मंडल के मुखिया लक्ष्मण धामेचा, धर्मा मूलवानी , मुकेश चावला, देवा अंदानी ,हंसराज मुलवानी, जगदीश केवलानी, अनिल केशवानी, राजू भोजवानी, राजेश चावला, मनीष,विकास गोविंदानी, अशोक चारवानी, लालू राजवानी ,बंटी जसवानी , झूलेलाल मंडल परिवार पूज्य सिंधी पंचायत के मुखी चंद्र लाल जसवानी, महेश राम राख्यानी, सन्तोष तेजवानी, अशोक डूमबानी, भगवान दास पंजवानीपूज्य पंचायत कार्यकारणी, झूलेलाल महिला मण्डल सहित समाज के हर वर्ग के लोग बड़ी संख्या में मौजूद है ।

