गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान, समर्पण एवं विश्वास का पर्व है गुरु पूर्णिमा-दिलीप नाग
गायत्री परिवार द्वारा यज्ञ, संस्कार एवं वृक्षारोपण का किया गया वृहद आयोजन

धमतरी. आषाढ़ शुक्ल पक्ष का पूर्णिमा प्रत्येक शिष्य के जीवन के लिए एक नया खुशियों भरा संदेश लेकर आता है। क्योंकि शिष्य अपने गुरु का स्मरण कर,उनका सान्निध्य पाकर गदगद हो जाता है। गुरु वह पारस पत्थर के समान है जिसके सानिध्य में शिष्य का मोल कई गुणा बढ़ जाता है, बहुमूल्य हो जाता है। उसके चरित्र, चिंतन, व्यवहार में परिवर्तन हो जाता है।

गायत्री परिवार के जिला समन्वयक दिलीप नाग ने बताया कि गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर गायत्री परिजनों में व्यक्ति, परिवार एवं समाज निर्माण के कार्य करने का जबरदस्त उत्साह,जोश एवं उमंग रहा। जिले के धमतरी, कुरुद, मगरलोड, नगरी एवं भखारा ब्लाक में एक से बढ़कर एक समाज उपयोगी प्रेरणादायक जन जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

जिसके अंतर्गत जिले भर के सभी 40 गायत्री पीठों, शक्तिपीठों, एवं प्रज्ञा मण्डलों में समूह साधना, यज्ञीय आयोजन, विभिन्न संस्कार जैसे गर्भवती बहनों का पुंसवन संस्कार, गुरु दीक्षा संस्कार, जन्म दिवस, विद्या आरंभ संस्कार कराया गया। साथ में वरिष्ठ नागरिकों एवं परिजनों का सम्मान एवं वृहद स्तर पर वृक्षारोपण किया गया।

परिजनों से प्राप्त जानकारी के अनुसार गर्भवती बहनों का पुंसवन संस्कार 41, दीक्षा संस्कार 35, विद्या आरंभ पांच शालाओं में 208, वृक्षारोपण 200 से अधिक,9 दम्पत्तियों का सामूहिक विवाह दिवस कार्यक्रम एवं 3 स्थानों पर बाल संस्कार शाला का शुभारंभ किया गया। सन् 2026 में शांतिकुंज हरिद्वार में आयोजित होने वाले माता जी के जन्म शताब्दी समारोह में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाने का संकल्प लिया । सभी आयोजनों में शक्तिपीठ, प्रज्ञा पीठ , प्रज्ञा मण्डल, महिला मण्डल, युवा मण्डल एवं सभी परिजनों की महत्वपूर्ण भागीदारी रही।

