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आमापारा में श्रीराम कथा सुनने उमड़ रहे श्रद्धालू

तीसरे दिन सुनाई गई विश्वमित्र आगमन, अहिल्या उद्धार, राम-सीता मिलन की कथा


धमतरी। जय बजरंग जस परिवार आमापारा धमतरी की ओर से चल रही सप्त दिवसीय श्रीराम कथा के तीसरे दिन शनिवार को कथा व्यास पंडित उमाशंकर शुक्ल ने कथा का शुभारंभ भगवान श्रीगणेश की स्तुति के साथ किया। दोपहर एक बजे से लेकर देर शाम तक चलने वाली श्रीराम कथा प्रसंग के दौरान उन्होंने शनिवार को विश्वमित्र आगमन, अहिल्या उद्धार, राम-सीता मिलन की कथा पर विस्तार से प्रकाश डाला। पंडित उमाशंकर शुक्ल ने भगवान राम सीता के पुष्प वाटिका मिलन का सुंदर वर्णन करते हुए कहा कि जब राम लक्ष्मण गुरु के साथ मिथिला के राजा जनक के यहां धनुष यज्ञ में शामिल होने जा रहे थे, तो उन्हें रास्ते में एक आश्रम मिला। जहां एक विशाल पत्थर का टुकड़ा पड़ा था। राम ने जब गुरु विश्वामित्र से इसके बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि यह गौतम ऋषि का विश्रामालय है। यह जो पत्थर देख रहे हो उनकी पत्नी अहिल्या है जो श्राप बस पत्थर हो गई है। तब राम ने अहिल्या को तारना चाहा, किंतु सूर्य वंश में स्त्री को पैर से छूना मना था। राम की यह दुविधा देख पवन देव ने अपने झोकों से प्रभु के चरणों की धूल पत्थर पर डाल दिया। चरण रज पाते ही पत्थर नारी हो गई। अहिल्या को प्रगट होते ही वहां ब्रह्मा, शंकर सहित अनेक देव गण पहुंच गए और भगवान राम का जयघोष करने लगे। इस कथा को सुन श्रद्धालु भावविभोर हो गए। इस मौके पर बिसेशर पटेल, प्रकाश शर्मा, सुरली गुप्ता, शरद पटेल, देवेन्द्र पिंकी यादव, गोलू यादव, पूरन नाग, गब्बर पटेल, नरेश वाधवानी, संजय आहुजा, अम्मू खटवानी, मुक्कू धीवर, कुमारी बाई, शकुन यादव, राम्हीन यादव, मंजू यादव, लता नाग, सुंदर नाग, मीना बैगा नाग, हेमंत नाग, लक्ष्मी नारायण नाग समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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