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भगवान श्रीराम में सहनशीलता और धैर्य की परकाष्ठा का विशेष गुण है-दीपक सिंह ठाकुर

हटकेशर में आयोजित त्रिदिवसीय श्रीरामचरितमानस महोत्सव का हुआ समापन

धमतरी-समस्त वार्ड वासियों के सहयोग से हटकेसर में त्रिदिवसीय संगीतमय मानस गान महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के ख्याति प्राप्त मानस मंडली सम्मिलित हुए रविवार को सायंकालीन बेला में उक्त आयोजन का समापन हुआ जिसमें हिंदू जागरण मंच युवा आयाम प्रमुख दीपक सिंह ठाकुर, अभिषेक शर्मा, जतिन देवांगन, लक्ष्मीनारायण स्वर्णकार, चित्रेश साहू, आशीष शर्मा उपस्थित हुए ।अतिथि उद्बोधन में मुख्य अतिथि दीपक सिंह ठाकुर ने कहा कि मर्यादा, त्याग, तपस्या, स्नेह की अविरल कथा श्रीरामचरितमानस है, भगवान श्री राम जी ने मर्यादा, करुणा, दया, सत्य, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलते हुए राज किया, इसी कारण उन्हें आदर्श पुरुष और मर्यादा पुरुषोत्तम भी कहा जाता है, भगवान राम में अनेक गुण हैं, जोकि हर व्यक्ति में जरूर होना चाहिए, भगवान श्रीराम में सहनशीलता और धैर्य की परकाष्ठा का विशेष गुण है। दीपक सिंह ने कहा कि श्रीराम कथा सुनने से जन्म-जन्मांतर के पाप खत्म होते हैं, श्रीराम कथा सुनने से मन शुद्ध होता है और सारे अनुष्ठानों का लाभ मिलता है, श्रीराम कथा सुनने से भव सागर पार किया जा सकता है। दीपक सिंह ठाकुर ने अपने उद्बोधन में कथा सुनाई जिसमें बताया कि राजा के ब्राम्हण भोग में, विषैले सर्प द्वारा अपने प्राणों की रक्षा के लिए , ज़हर का दंश बाज को मारते वक्त आकाश से भोजन में गिरा और हजारों ब्राम्हणों की मृत्यु हो गई तो इस पाप का फल कौन भोगेगा ? इस कथा द्वारा दीपक ठाकुर ने परनिंदा न करने के लिए, ईर्ष्या, द्वेष न रखने और अहंकार से बचने हेतु प्रेरित किया। सनातन धर्म की शक्ति को बताया और कहा कि हिन्दू सिर्फ जन्म से ही होता है और इस धर्म को धारण करने का कोई विधान शास्त्रों में नहीं है। सनातन धर्म को जाने समझे बिना स्वार्थवश कोई और धर्म में पलायन करना महापाप है। ईश्वरीय शक्ति को जानने और पहचानने कि आवश्यकता है। भगवान को अगरबत्ती और नारियल भेंट कर सारी दुनिया का सुख मांगने के पूर्व हमें ये सोचना होगा कि हमने कितना वक्त अपने आराध्य को दिया है, हम कितना जप, तप, व्रत या भक्ति करते हैं, स्वयं से पूछने की आवश्यकता है। स्वार्थ पूर्ति के चक्कर में भगवान बदल लेना अधम लोगों की पहचान है। अध्यात्म समर्पण और संकल्प का नाम है जब हम सुख में ईश्वर की आराधना करते हैं, तो दुख हमारे आसपास भी नहीं फटकता है।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

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