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करोड़ो की लागत से कई तालाबों का सौदर्यीकरण लेकिन आम जनता को नहीं मिल रहा लाभ नशेडिय़ों असामाजिक तत्वों का रहता है जमघट

अधिकांश तालाबों के आसपास के रहवासी है असामाजिक तत्वों के अड्डेबाजी और हरकतों से परेशान


धमतरी। शहर के भीतर कई तालाबों का अस्तित्व बचाने नगर निगम द्वारा तालाबों के संरक्षण की दिशा में कार्य कर रही है। जिसके तहत करोड़ खर्च कर तालाबों का कायाकल्प किया गया है। लेकिन इसका लाभ आमजनता को नही मिल पा रहा है। क्योंकि यहां दिन रात नशेडिय़ों और असामाजिक तत्वों का जमघट लगा रहता है।
बता दे कि शहर के कई तालाबों जिनमें मकई तालाब, रमसगरी तालाब, आमातालाब, महिमासागर तालाब, खोडिय़ा तालाब, दीवान तालाब, सुबन तालाब, कठौली तालाब, गंगा तालाब, कांटा तालाब, सहित अन्य तालाबों में सौदर्यीकरण व संरक्षण की दिशा में कार्य हुए है। यहां जनता के करोड़ो खर्च किये गये है। ताकि आम जनता को इसका लाभ मिल सकें। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। तालाब के किनारे अक्सर गंजेडिय़ों, शराबियों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। वे यहां दिन भर नशा कर अड्डेबाजी करते है। कई तालाब के पास तो नशेडिय़ों द्वारा बकायदा तीन टप्पर लगाकर झोपड़ी नुमा अड्डा बनाया गया था। जिसे पूर्व में पुलिस द्वारा तोड़ा गया था। वर्तमान में कुछ अड्डे अभी भी है तालाब के किनारे पाथवे, बैठक व्यवस्था पचरी निर्माण लाईटिंग आदि की गई है। ताकि लोग यहां वॉक कर करके तालाब के पास समय बीता सकें। तालाब में स्नान कर सकें। सामाजिक व शोक कार्यक्रम बेहतर तरीके से निपटाया जा सकें। लेकिन दिन भर असामाजिक तत्वों के जमघट के कारण लोग विशेषकर महिलायें व युवतियां तालाब के पास आने से भी झिझकते है। कई बार नशे में यहां लूटपाट और लड़ाई झगड़े पर भी उतारु हो जाते है। अन्य कार्य की भी औपचारिकता निभाई जाती है। तालाब किनारे के रहवासी तो इन असामाजिक तत्वों की हरकतों से परेशान हो चुके है। आलम यह है कि कभी इन्हें गाली गलौच, अड्डेबाजीे करने या जुआ खेलने से मना करना पर यह मारपीट पर भी उतारु हो जाते है। इसलिए लोग अब इन्हें रोकटोक करने से भी परहेज करते है।
मकई गार्डन और रमसगरी गार्डन का पूर्णत: बाउंड्रीवाल किया गया है। मकई गार्डन ठेके पर है। इसलिए यहां भीतर असामाजिक तत्व नहीं भटकते लेकिन तालाब के किनारों पर तो नशाखोरी व अन्य अनैतिक कार्य होने की शिकायते मिलती रहती है। वहीं रमसगरी गार्डन में तो अंदर बाहर भी असामाजिकतत्वों की मनमर्जी चलती है।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

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