सौर मंडल, नक्षत्र वन, राशि वन, देवगुड़ी के अस्तित्व पर खतरा

धमतरी। गंगरेल बांध प्रदेश का प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थल है यहां रोजाना हजारो लोग पहुंचते है। शुक्रवार रविवार और विशेष छुट्टियों के दिनों में तो यहां भीड़ रिकार्ड तोड़ होती है। यहां पहुंचने वाले पर्यटक जब हर्बल मानव वन 20 रुपये फीस चुका कर पहुंचते है तो उन्हें ठगा हुआ महसूस होता है। क्योंकि मानव वन में अब 20 रुपये एंट्री शुल्क जैसे कुछ खास नहीं रह गया है।
बता दे कि सालों पहले मानव वन का निर्माण, गंगरेल क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाया गया था। शुरुवात में यहां जंगली जानवर भी रखा गया था। कई प्रकार के आकर्षक कार्य जैसे सौर मंडल का निर्माण, नक्षत्र वन, राशि वन और देवगुड़ी का निर्माण शामिल था। यह लोगों में आकर्षण का केन्द्र था। धीरे-धीरे देखरेख के आभाव में यह कबाड़ में तब्दील होते गया फिर पर्यटकों को मोह भी मानव वन से भंग होने लगा बीच में तो यहां पर्यटक काफी कम पहुंचते थे। यहां हरियाली और बागवानी का विशेष ख्याल नहीं रखा जा रहा है। पहले मानव आकृति पर लगाये गये हर्बल पौधो से लोगों को औषधि की जानकारी मिलती थी। मानव वन में ज्ञानवर्धक संरचनाएं लोगों को आकर्षित करती थी। वहीं विशाल मानव आकृति बनाकर उसके अलग-अलग अंग में औषधि पौधे लगाये गये थे। उस समय औषधि पौधो की जानकारी व इससे उपचार करने का उपाय बताने गाइड की व्यवस्था थी। वर्तमान में अधिकांश क्षेत्र जो नक्षत्र सौर मंडल है उन पर घास फुस झाडिय़ां उग आई है। जो पौधे लगे है वह औषधि है या सामान्य पौधे यह भी पता नहीं चल पाता। मानव में दो-तीन झूले है और विशेष कुछ नहीं रह गया है। इस संबंध में महासमुंद से गंगरेल पहुंचे राजकुमार सोनी ने कहा कि परिवार संग गंगरेल पहुंचे मानव वन भी गये जहां 20 रुपये एंट्री शुल्क ेलिया गया। इससे लगा कि यहां कुछ खास व मनोरंजक व्यवस्था होगी लेकिन यह सामान्य शासकीय गार्डन से भी पिछड़ा हुआ है। न तो हरियाली न बागवानी पर फोकस है और न ही ऐसी व्यवस्था है कि एंट्री 20 रुपये लिया जाये।