किले के बुढ़ेश्वर महादेव का हो रहा 24 घंटे का अखण्ड जलाभिषेक
बीती रात्रि मंदिर में हुआ मंगल गीत के साथ संगीत कार्यक्रम, भक्ति में मंत्रमुग्ध रहे शिवभक्त
आज शाम शहर में निकाली जाएगी शिव जी की बारात, कल महाशिवरात्रि पर सभी शिव मंदिरो में होगी विशेष पूजा

धमतरी । किले के बुढ़ेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व को धूमधाम से मनाया जा रहा है जिसके तहत रोजाना विविध कार्यक्रम हो रहे है। बीती रात्रि मंदिर में मंगलगीत के साथ संगीत कार्यक्रम हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। संगीत कार्यक्रम में भक्त मंत्रमुग्ध होकर भक्ति में लीन रहे। वहीं आज प्रात: 5 बजे से बुढ़ेश्वर महादेव का 24 घंटे का अखण्ड जलाभिषेक प्रारंभ हुआ जो कि कल प्रात: 5 बजे तक जारी रहेगा। आज सुबह से ही भक्त मंदिर पहुंचकर भगवान बुढ़ेश्वर का जलाभिषेक कर रहे है। आज शाम किले के बुढ़ेश्वर महादेव मंदिर समिति द्वारा भगवान भोलेनाथ की बारात शहर में निकाली जाएगी जिसमें विभिन्न झांकियां भक्तों में आकर्षण का केन्द्र रहेगी।

उल्लेखनीय है कि महाशिवरात्रि पर्व को लेकर भक्तो में उत्साह का माहौल है। महाशिवरात्रि पर जिले के सभी शिव मंदिरो में विशेष पूजा अर्चना की जाएगी जिसकी तैयारियां पूर्ण हो चुकी है। अलसुबह से ही शिवालयो में हर हर महादेव के जयकारे गूंजने लगे है। वहीं आज से अखंड महाजलाभिषेक शुरु हो गया है, जो अनवरत 24 घंटे जारी रहेगा। कल महाशिवरात्रि पर शिवालयों में विशेष पूजा, महाआरती सहित अन्य विविध कार्यक्रम होंगे। महाशिवरात्रि पर कल सुबह से इतवारी बाजार स्थित किले के बूढ़ेश्वर महादेव, रिसाईपारा के नागेश्वर महादेव, मकई चौक के मकेश्वर, हटकेशर के नागेश्वर महादेव, शिव चौक के बटूकेश्वर महादेव, रुद्री के रुद्रेश्वर, बनियापारा के सिद्घेश्वर महाकालेश्वर, सिहावा चौक के शिव मंदिर सहित अन्य शिवालयों में भक्तों का तांता लगेगा। ज्ञात हो कि भगवान शिव के जलाभिषेक, पूजा, दर्शन से पुण्य लाभ मिलता है। भगवान शिव को बेलपत्र, जल, दूध, फुहड़ के फूल, भांग आदि अर्पण करने से मनोकामना पूर्ण होती है।
बन रहे तीन शुभ संयोग

महाशिवरात्रि पर्व पर इस बार विशेष महायोग बन रहा है। इससे भक्तो पर शिव की विशेष कृपा बरसेगी। महाशिवरात्रि को लेकर शिवालयो में तैयारी शुरु हो गई है। इसके तहत उक्त दिन भक्त अपने-अपने अंदाज में आस्था प्रकट कर मनवांछित फल की कामना करेंगे। ज्योतिषो की माने तो फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। पंडित राजकुमार तिवारी ने बताया कि इस साल महाशिवरात्रि पर्व पर वैदिक पंचांग के अनुसार 60 साल बाद धनिष्ठा नक्षत्र, परिघ योग, शकुनी करण और मकर राशि में चंद्रमा की उपस्थिति रहेगी। महाशिवरात्रि माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह का पर्व है। पर्व के दिन महामृत्युंजय, पंचाक्षरी मंत्र के साथ संजीवनी मंत्र का जाप सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति दिला सकता है।
