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गर्मी की शुरुवात के साथ जल स्तर में आ रही गिरावट

नदी, तटीय क्षेत्रो के साथ नगरी, मगरलोड ग्रामीण क्षेत्रो में शुरु हुआ जल संकट

एक से डेढ़ मीटर गिरा जल स्तर, 17.70 मीटर है जिले का औसत जल स्तर

धमतरी। मौसम विभाग द्वारा इस साल भीषण गर्मी पडऩे का अनुमान लगाया है। इसके साथ ही इसका असर भी दिखना प्रारंभ हो गया है। फरवरी माह से ही गर्मी का अहसास बढऩे लगा है जो कि मार्च के शुरुवात में और बढऩे लगा है। गर्मी की दस्तक के साथ ही फरवरी माह से भूमिगत जल स्तर में गिरावट आने लगा है। जो कि आने वाले महीनों में गंभीर जल संकट का कारण बन सकता है।
बता दे कि फरवरी माह में ही जिले में कई स्थानों पर वाटर लेवल में गिरावट दर्ज की गई है। गंभीर विषय है कि फरवरी में ही एक से डेढ़ मीटर तक जल स्तर नीचे चला गया है। ऐसे में आने वाले महीनों में भीषण गर्मी पडऩे पर जल स्तर कई मीटर नीचे जा सकता है। जिससे भीषण जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। धमतरी में औसतन भूमिगत जल स्तर 17.70 मीटर माना गया है। पिछले बार मगरलोड क्षेत्र के गांवो में यहां जल स्तर 23 मीटर तक चला गया था। इस बार ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो इसलिए कई प्रयास किये गये है। हालांकि इन प्रयासों का विशेष लाभ मिलता नजर नहीं आ रहा है। ज्ञात हो कि जिले में सबसे ज्यादा जल संकट नदी, तटीय इलाकों और नगरी, मगरलोड क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में रहता है। ऐसा माना जाता है कि अंधाधुन रेत खनन के कारण प्राकृतिक भूमिगत जल स्त्रोत भी खत्म होते जा रहे है।
नगरी, मगरलोड के कई ग्रामीण इलाकों में मोटर पंप, कुंए, हैण्डपंप सूखने लगे है। ऐसे में भी यहां जल संकट की शिकायते लगातार मिल रही है। आने वाले समय में यह शिकायते काफी बढ़ सकती है। नवागांव (थूहा) बिन्द्रानवागांव, माटेगहन मुरुमडीह, दाबगांव, अंवरी, जरवायडीह, कुम्हड़ाकोट आदि गांवो में भूजल स्तर नीचे चला गया है। इसका प्रमुख कारण धान की ज्यादा फसल लेने खेतो में ज्यादा मोटर पंप चलाने पानी का सद्पयोग नहीं करने, जल संरक्षण की दिशा में सार्थक कार्य नहीं होने, वनो की कटाई, रेत का अंधाधुन खनन, तालाबों के सूखने आदि को माना जा रहा है।

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