जितनी ज्यादा हमारी कामनाएं, आवश्यकताएं, जरूरतें होंगी उतना ही हम शान्ति से दूर होंगे-स्वामी भगत प्रकाश

आचार्य सद्गुरु स्वामी टेऊॅंराम जी महाराज के 41 दिन के जन्म महोत्सव में जारी चालीहा महोत्सव के 15 वें दिन के चालीसा पाठ का कार्यक्रम श्री प्रेम प्रकाश आश्रम परिसर में एक गुरुभक्त के परिवार द्वारा गुप्त रूप से कराया, इस आयोजन में रात्रि 9.30 से 10.30 तक गुरुदेव की महिमा से भरे भजन गाए गए फिर चालीसा पाठ कर प्रसाद वितरण किया गया.श्री प्रेम प्रकाश मण्डल के वर्तमान अध्यक्ष गुरुदेव सद्गुरु स्वामी भगत प्रकाश महाराज ने गुरु के शान्त स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भगवत गीता में श्री कृष्ण ने कहा है प्रशान्त मन वाला है जिसका मन शांत स्थिर एवं बिना उत्तेजना वाला होता है वही सिमरन कर मुझे प्राप्त कर सकता है.इस संसार में शान्ति केवल मुझमें समाई हुई है संसार में तो अशांति ही व्याप्त है जब जीव का मन स्थिर होता है माने बिना किसी उत्तेजना के होता है तो ही वह मेरा ध्यान कर पाता है और मेरे ध्यान करने से ही परम शान्ति की अनुभूति कर पाता है.आचार्य सद्गुरु स्वामी टेऊॅंराम जी महाराज ने अपने मन को स्थिर कर लिया संसार की कभी न समाप्त होने वाली आशाओं को मिटा लिया एवं निजात्म के ध्यान में लीन हो गए और गुरु नाम के सिमरन से परम शान्ति को प्राप्त किया. उस पूर्ण ब्रह्म परमात्मा में अपने को मिला लिया ईश्वर पूर्ण है संसार अधूरा अपूर्ण.असंतुष्ट है इस संसार में मनुष्य जन्म का मूल उद्देश्य ईश्वर से मिलना है जो अन्य किसी भी योनि में संभव नहीं जिस भी जीव ने पूर्ण ईश्वर की अनुभूति कर ली उसका इस संसार में आने का उद्देश्य पूर्ण हो गया इसी बात को सद्गुरु स्वामी भगत प्रकाश जी महाराज ने समझाया है आचार्यश्री पूर्ण से मिल कर पूर्ण काम हो गए इस पूर्णता को इस लक्ष्य को आचार्य श्री ने प्राप्त कर लिया एवं समाज के लिए सन्देश दिया कि झील शांत एवं सागर अशांत होता है क्योंकि झील छोटी होती है जबकि सागर विशाल होता है इसी प्रकार से यदि हमारी आवश्यकता जरूरतें कम होगी तो हम शांति के नजदीक होंगे इसे प्राप्त करना आसान होगा इसके उलट जितनी ज्यादा हमारी कामनाएं आवश्यकताएं जरूरतें होंगी उतना हम शान्ति से दूर होंगे इसे हम प्राप्त कर ही नहीं पाएंगे. और आवश्यकताओं को पूरा करते करते हमारा अमूल्य जीवन ही समाप्त हो जाएगा.