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निजी लैबो में बढ़ी रक्त प्रिजर्वेशन सहित जाँच की सुविधा लेकिन सरकारी तंत्र में सुविधाओं की कमी

बढ़ी निजी लैब व पैथलॉजिस्ट की संख्या, सरकारी लैब व पैथलॉजिस्ट की कमी है बरकऱार

रक्तदान के प्रति लोगो में आ रही जागरुकता, रक्त की कमी से अब नहीं होती मरीजों की मौत

धमतरी। कुछ साल पहले तक रक्त की उपलब्धता काफी कम हुआ करता था, लोग रक्तदान करने से पीछे हटते थे. उनमें रक्तदान को लेकर कई तरह की भ्रांतियां थी और यदि रक्तदान किया भी जाता था तो रक्त को सुरक्षित रखने हेतु ब्लड बैंक कम थे। जिसके चलते भी रक्त का स्टाक कम रहता था। इसलिए आपातकालीन स्थिति में बात गंभीर मरीजों की जान पर आ जाती थी। लेकिन समय के साथ हालात में काफी सुधार हो चुका है। अब रक्त की कमी से मरीजों की मौत नहीं होती है। जिले में रक्तदाताओं की संख्या कई गुणा बढ़ चुकी है। साथ ही रक्त को सुरक्षित रखने हेतु ब्लड बैंक भी है। जिसके चलते आपातकालीन के लिए जांचा हुआ ब्लड मरीजों के लिए तैयार रहता है। ब्लड स्टोरेज की क्षमता बढऩे से अब ब्लड की कमी से मरीजों की मौत नहीं होती। सामान्य ब्लड ग्रुपो के साथ ही रेयर ब्लड ग्रुप (निगेटिव) की उपलब्धता कराने विभिन्न समाजसेवी संगठन द्वारा उनकी जानकारी रखी जाती है जो कि समय पर मरीजों को उपलब्ध करा कर रक्त की व्यवस्था करवाई जाती है।
जिला अस्पताल धमतरी में स्वास्थ्य सुविधाओं का लगातार विस्तार हो रहा है। यदि ब्लड बैंक की व्यवस्था की बात की जाये तो जिला अस्पताल में संचालित सरकारी ब्लड बैंक में 300 युनिट क्षमता वाले दो रेफ्रिजरेटर है। ऐसे में ब्लड बैंक की क्षमता 600 युनिट स्टोरेज की है। जिला अस्पताल में मरीजों के आपात स्थिति के लिए पर्याप्त ब्लड का स्टाक रखा जाता है। जब मरीजों को ब्लड की आवश्यकता होती तो उनके परिजनों से ब्लड डोनेट व एक्सचेंज करने कहा जाता हैं। यदि फिर भी ब्लड नहीं दिया जाता तो अपने स्टाक से मरीजों को ब्लड चढ़ाया जाता है। बता दे कि जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में मरीजों के परिजनों से लिये गये. व रक्तदान में मिले ब्लड से स्टोरेज रखा जाता है।
जरुरतमंदो को रक्त उपलबध कराने बने है कई ग्रुप,कर रहे निस्वार्थ भाव से सेवा
पिछले कुछ सालों से रक्त की आपूर्ति ज्यादातर सोशल मीडिया के माध्यम से हो रही है। विभिन्न समाज सेवियों, सामाजिक संगठन, सेवाभावी संगठनों द्वारा रक्तदान के लिए विशेष ग्रुप बनाया गया है। जिसमें रक्तदाताओं को जोड़ा गया है. यदि मरीज या परिजन रक्त ग्रुप से जुड़ा है तो वह स्वयं नहीं तो किसी अन्य के माध्यम से उक्त ग्रुपो में रक्त को आवश्यकता की जानकारी दी जाती है उसके पश्चात कई रक्तदाता जरुरतमंदो की मद्द हेतु आगे आते हैं। उक्त ग्रुपो के माध्यम से कोरोना काल के दौरान भी जब रक्त की डिमांड ज्यादा थी और आपूर्ति कम तब थी जरूरत मंदो को मद्द कर मानवता का परिचय दिया गया। इसके अतिरिक्तं विशेष मौको पर विभिन्न समाजों, संगठनों द्वारा रक्तदान शिविर लगाया जाता है। जिससे भी रक्त की आपूर्ति में मद्द मिलती है। साथ ही लोगो में रक्तदान के प्रति जागरुकता आती है।
रक्तदान से नहीं आती कमजोरी, होता है शरीर को फायदा
रक्तदान को लेकर पहले लोगों में कई तरह की भ्रांतिया थी, लेकिन अब लोग जागरुक हो रहे है। लोगों को लगता था कि रक्तदान से उनके शरीर में कमजोरी आयेगी रक्त की कमी होगी, ऐसे बिल्कुल नहीं होता बल्कि रक्तदान से शरीर को कई प्रकार के फायदे होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार रक्तदान से वजन कंट्रोल में रहता है। कैलोरी बर्न होती है। ब्लड डोनेशन से शरीर में आयरन की मात्रा संतुलित रहती है। जिससे दिल से जुड़ी बीमारियों और स्ट्रोक का खतरा कम होता है। रक्तदान के बाद रक्त की कमी को पूरा करने शरीर रेड सेल्स का निर्माण करता है। ज्यादा रेड सेल्स बनता है। जो कि सेहत के लिए फायदेमंद होता है।
प्रतिदिन 400-450 यूनिट ब्लड की आवश्यकता
जिले में शासकीय व निजी अस्पतालों में रोजाना हजारों मरीजों का उपचार होता है। इनमें कुछ ऐसे मरीज भी होते है। जिन्हें ब्लड की आवश्यकता होती है वहीं कई ऐसे है जिनकी सर्जरी होती है। ऐसे में उन्हें कई युनिट ब्लड की आवश्यकता पड़ती है। कुछ सिकलिन जैसे रक्त अल्पता वाली बीमारियों से ग्रसित रहते है। उन्हें भी एक अतंराल के बाद रक्त की आवश्यकता होती है इसलिए जिले में रोजाना ब्लड की आवश्यकता होती है। जानकारों की माने तो जिले में औसतन रोजाना 400 से 450 युनिट ब्लड की आवश्यकता होती है। वहीं जिला अस्पताल की बात करे तो प्रतिदिन औसतन 15 से 20 युनिट ब्लड की आवश्यकता मरीजों को होती है। ऐसे में ब्लड डोनेंशन के लिये सभी से आगे आना चाहिए।
आरएच नल ब्लड ग्रुप है सबसे रेयर, 8 अरब की आबादी में है सिर्फ 45 लोगो का ब्लड ग्रुप
इंसानों के शरीर में ए, बी, एबी, ओ पॉजिटिव और नेगेटिव जैसे आठ तरह के ब्लड ग्रुप पाए जाते हैं. लेकिन एक ऐसा ब्लड ग्रुप भी है जिसके बारे में लोग ज्यादा नहीं जानते हैं। पूरी दुनिया की आबादी करीब आठ अरब है, लेकिन इतनी बड़ी जनसंख्या में यह केवल 45 लोगों के शरीर में आरएच नल ब्लड ग्रुप पाया जाता है। यह ब्लड ग्रुप उन लोगों के शरीर में मिलता है जिनका आरएच फैक्टर नल होता है. यह बहुत दुर्लभ ब्लड ग्रुप है. इसी वजह से इसे गोल्डन ब्लड भी कहा जाता है।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

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