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अच्छी फसल, सुख-शांति व समृद्धि की कामना के साथ कुरुद क्षेत्र में मनाया गया हरेली पर्व


कुरुद। कुरुद क्षेत्र में हरेली पर्व धूमधाम से मनाया गया किसानो ने हल, बैल और खेती के औजारों को धोकर साफ किए और पीपल-नीम की डालियों से सजाया। धरती माता और अन्नपूर्णा देवी की पूजा की गई। यह पूजा सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि धरती और फसल के प्रति आभार जताने का श्रद्धा भाव है। कई परिवारों ने घर के आंगन में पूजा की — जहां तुलसी चौरे को सजाया गया, और वहीं पास में कृषि औजारों को रखकर पूरी श्रद्धा से पूजा-अर्चना की गई। अच्छी फसल, सुख-शांति व समृद्धि की कामना की। हरियाली बचाने का संकल्प भी लिया गया। हरेली का नाम ही है हरियाली से और इसे बचाने की जिम्मेदारी भी सबने मिलकर निभाई। कुरुद क्षेत्र में युवाओं, बच्चों और महिला मंडलों ने मिलकर नीम, तुलसी, बरगद, आम जैसे पौधे लगाए। पेड़ लगाओ, पर्यावरण बचाओ के नारों से गांवों और गलियों की फिज़ा बदल गई।
लोक संस्कृति और खेलों का उल्लास
कुरुद क्षेत्र के विभिन्न गांवों में गेड़ी चढऩा, बैल दौड़, कबड्डी, रस्साकशी जैसी पारंपरिक खेल गतिविधियाँ हुईं, जिनमें बच्चों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। ये खेल न सिर्फ मनोरंजन का हिस्सा रहे, बल्कि छत्तीसगढ़ की जीवंत संस्कृति की पहचान भी बने।

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