Uncategorized

जीवन में परिवर्तन एक दिन में नहीं आता, लेकिन एक दिन जरूर आता है – परम पूज्य प्रशम सागर जी म.सा.


धमतरी। परम पूज्य उपाध्याय प्रवर अध्यात्मयोगी महेंद्र सागर जी महाराज साहेब परम पूज्य उपाध्याय प्रवर युवामनीषी स्वाध्याय प्रेमी मनीष सागर जी महाराज साहेब के सुशिष्य परम पूज्य प्रशम सागर जी महाराज साहेब परम पूज्य योगवर्धन जी महाराज साहेब श्री पाश्र्वनाथ जिनालय इतवारी बाजार धमतरी में विराजमान है। आज परम पूज्य प्रशम सागर जी महाराज साहेब ने प्रवचन के माध्यम से फरमाया कि हमारे जीवन की अर्थी उठने से पहले जीवन का अर्थ समझकर उसे सार्थक करने का प्रयास करना है। हमें शरीर और आत्मा के भेद को समझकर आत्मा को परमात्मा बनाने का पुरुषार्थ कर लेना है। जीवन रेशम के धागे जैसा है इसे जितना सुलझाने का प्रयास करते है ये उतना ही अधिक उलझते जाता है। विवेक और वैराग्य का दीपक जिसके जीवन में जल जाता है उसकी आत्मा स्वत: ही प्रकाशमान हो जाती है। नदी कितना ही विशाल हो उसे एक दिन समुद्र से मिलना ही पड़ता है। सूर्य में कितना भी तेज हो किंतु हर दिन उसका अस्त होने निश्चित है। उसी प्रकार हम अपने जीवन को चाहे कितना भी साधन, सुविधा और संपत्ति से पूर्ण कर ले। किंतु एक दिन ये सब छोड़कर जाना ही पड़ेगा।
टीकाकार भगवंत बताते है कि चाहे जितना भी पुरुषार्थ कर ले लेकिन जीवन टिकने वाला नहीं है। इसलिए हे चेतन तू जीवन को टिकाने का प्रयास मत कर उसके स्थान पर पर तू जीवन से कुछ पाने का प्रयास कर। जीवन में परिवर्तन लाने का प्रयास कर। जीवन से कम से कम एक पाप को छोडऩे का और तोडऩे का प्रयास कर। ताकि जीवन असंस्करित से संस्करित की ओर आगे बढ़ जाए। जीवन में उचित परिवर्तन लगे का प्रयास करते रहना चाहिए। परिवर्तन का प्रयास करने वाला ही सफलता की सीढ़ी पर चढ़ सकता है। जीवन में प्रतिदिन अपने गुरु से एक नियम अवश्य लें चाहिए। यही नियम जीवन को परिवर्तित कर सकता है। जीवन में परिवर्तन एक दिन में नहीं आता, लेकिन एक दिन जरूर आता है। जो पाप हमारा पीछा नहीं छोड़ रहा है हमें उसके पीछे लग जाना चाहिए। निश्चित ही एक दिन उस पाप से मुक्ति प्राप्त करने में सफलता मिल जाएगी। उसी प्रकार अपने जीवन में एक सुकृत करने का नियम जरूर बनाना चाहिए ताकि जीवन में परिवर्तन अर्थात आत्मविकास का मार्ग खुला रहे। धर्म के नाम पर की जाने वाली सतत क्रिया ही धर्म है। जीवन में पापों की आलोचना करने वाला ही पाप से मुक्ति का पुरुषार्थ कर सकता है।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!