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प्रत्येक नागरिक को अपने राष्ट धर्म को निभाते हुए धर्म के मार्ग पर भी आगे बढ़ना है-परम पूज्य प्रशम सागर जी म.सा.

परम पूज्य उपाध्याय प्रवर अध्यात्मयोगी महेंद्र सागर जी महाराज साहेब परम पूज्य उपाध्याय प्रवर युवामनीषी स्वाध्याय प्रेमी मनीष सागर जी महाराज साहेब के सुशिष्य परम पूज्य प्रशम सागर जी महाराज साहेब परम पूज्य योगवर्धन जी महाराज साहेब श्री पार्श्वनाथ जिनालय इतवारी बाजार धमतरी में विराजमान है। आज 15 अगस्त को परम पूज्य प्रशम सागर जी महाराज साहेब ने प्रवचन के माध्यम से फरमाया कि चातुर्मासकाल के क्रम में हम सभी अपने जीवन के सही उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए पुरुषार्थ कर रहे है। जिनशासन हमें आत्मा को जानने पहचानने और आत्मा के जीने की प्रेरणा देता है जीना सिखाता है। आज भारत देश की आजादी का दिन है, आज स्वतंत्रता दिवस है। देश के प्रति अपने प्रेम को अहोभाव को प्रकट करने के लिए आज का पर्व मनाते है। आज देश के लिए जिन्होंने अपना बलिदान दिया उन्हें याद करने का पर्व है। ये पर्व एक राष्ट्रीय पर्व के रूप में पूरे देश में आज मनाया जा रहा है। आज के दिन देश ने अंग्रेजों की गुलामी से आजादी पाई थी। देश की आजादी में उन सभी का योगदान है जिन्होंने तन, मन, धन से योगदान दिया। तभी आज हम एक स्वतंत्र देश में सांस ले पा रहे है। आज उन सभी को नमन करने का उनके बलिदान को याद करने का अवसर है। देश के प्रत्येक नागरिक को अपने राष्ट धर्म को निभाते हुए धर्म के मार्ग पर भी आगे बढ़ना है । ताकि देश का विकास हो सके। हम सभी को देश के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन करना है। आज हमें याद करने का प्रयास करना है कि क्या हम राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य को अच्छे से निभा रहे है? अगर अपने राष्ट्र के प्रति कर्तव्य को अच्छे से नहीं निभा रहे है तो शायद स्वतंत्रता दिवस का पर्व मानने का कोई अर्थ नहीं है। आज हमें देश के प्रति अपने कर्तव्य को याद करने का पर्व है। शायद हम अपने कर्तव्यों को भूलते जा रहे है। इसलिए इस पर्व के माध्यम से अपने कर्तव्यों को याद करते हुए उसे पूरा करने का प्रयास करना है। हमें इस देश के एक अच्छे नागरिक होने का कर्तव्य निभाना है। एक अच्छे नागरिक के रूप में सरकार द्वारा प्राप्त सुविधाओं का उचित उपयोग करना है। संविधान का पालन करना है। अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखना चाहिए। जीवन में अनुशासन और कर्तव्य होना आवश्यक है। इसके अभाव में अराजकता फैल जाती है। इसलिए कर्तव्यों का पालन करना चाहिए ताकि देश के विकास का मार्ग प्रशस्त हो सके। और इस विकास में देश की समस्त जनता का योगदान होना चाहिए। जिस दिन हम भारत देश का अपने लिए किया गया उपकार याद करेंगे, उसे मानेंगे उस दिन देश के प्रति सम्मान की भावना अपने आप आ जाएगी। परमात्मा कहते है हमे अपने देश के प्रति, पारिवारिक, सामाजिक, धार्मिक सभी कर्तव्यों का पालन अवश्य करना चाहिए। क्योंकि देश होगा तो समाज होगा। समाज होगा तो ही हम होंगे। इस लिए प्रत्येक कर्तव्य का पूरी निष्ठा से पालन करना चाहिए। हम देश के तंत्र का पालन करके ही देश की स्वतंत्रता का आनंद ले सकते है।तीन तरह की जीवन शैली होती है स्वतंत्रता स्व अर्थात स्वयं और तंत्र का अर्थ है अनुशासन। अर्थात जब हम स्वयं के बनाए नियमों का अनुशासन का पालन करते हुए जीवन व्यतीत करते है तब वह स्वतंत्रता कहलाता है।
परतंत्रता, भारत देश 15 अगस्त 1947 से पहले परतंत्र था। पर अर्थात दूसरों का और तंत्र अर्थात अनुशासन। अर्थात जब हम दूसरों के अनुशासन से चलते है तब वो परतंत्रता कहलाता है।
स्वछंदता अपने मन से जीना। अर्थात जब जैसा मन करे तब वैसा काम करना। अर्थात अपनी इच्छानुसार कार्य करना। अपने मन से कार्य करने का राग ही स्वछंदता है। स्वछंदता हमे मर्यादा में अर्थात अनुशासन अर्थात तंत्र में रहने नहीं देता। जीवन में अनुशासन बहुत जरूरी है। अनुशासन हमे गलत मार्ग पर जाने से रोकता हैं। हमारा अनुशासन ही हमे विनाश से विकास की ओर ले जाता है। हमारी तंत्र व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे जीवन का विकास निश्चित हो सके.परमात्मा कहते है हमने शरीर की दृष्टि से बहुत सारे पर्व मनाए है और वर्तमान में भी मना रहे है। अब इस नाशवान शरीर से शाश्वत आत्मा को स्वतंत्रता मिल जाए ऐसा पुरुषार्थ करना है। हमारी आत्मा सिद्ध ,बुद्ध और मुक्त हो जाए, शाश्वत सुख को हम भी प्राप्त कर सकें ऐसा प्रयास करना है। वर्तमान में हमारा धर्म शायद रीति रिवाजों को पूरा करने के लिए चल रहा है। जबकि आत्मा का स्वभाव ही धर्म कार्य में लीन रहना है। ज्ञानी कहते है हमें प्रयास करना है कि हमारे जीवन में भी एक ऐसा तंत्र आ जाए जिससे आत्मा के विकास का मार्ग खुल जाए। इस संसार से आत्मा को सिद्ध अवस्था तक पहुंचाने के लिए तंत्र अर्थात अनुशासन की जरूरत होती है।

*राष्ट्रगान का आयोजन*

आज 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रवचन के समय प्रवचन हाल में गुरु भगवन्तों की पावन निश्रा में राष्ट्रगान का आयोजन किया गया। उपस्थित सभी समाजजनों ने अपने स्थान पर खड़े होकर राष्ट्रगान गाया। देश के प्रति अपना सम्मान प्रकट किया।

*तपस्या का क्रम जारी*

आज मयंक पारख सुपुत्र मनीष पारख के 26 उपवास है।
अक्षत डागा सुपुत्र मनोज डागा के आज 6 उपवास है।संघ सभी तपस्वियों की सुखशाता पूछते हुए बारंबार अनुमोदना करता है।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

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