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भूसा, राखड़ गाडिय़ा रोजाना सैकड़ो लोगों की आंखो को पहुंचा रहे नुकसान

सही तरह से पैकिंग नहीं करने, फटे पुराने तिरपाल का उपयोग करने के कारण परिवहन के दौरान रास्ते भर उड़ता है भूसा, राखड़

पुलिस के सामने से रोजाना गुजरती है गाडिय़ा लेकिन नहीं होती कार्रवाई

धमतरी। शहर से होकर रोजाना दर्जनों राखड़ व भूसा भरी गाडिय़ों गुजरती है। लापरवाही से आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार तो यह दुर्घटनाओं का भी कारण बन जाती है।
बता दे कि रोजाना ट्रक, ट्रैक्टर, आदि भारी वाहनों में भूसा व राखड़ भरकर परिवहन किया जाता है। चूंकि धमतरी जिले में राईस मिल की अधिकता है। जिले में लगभग 230 राईस मिले है। इसलिए भारी मात्रा में धान का कोढ़ा भूसा निकलता है। साथ ही राखड़ भी जमा होता है। भूसा का उपयोग तेल निकालने सहित अन्य कार्यो में किया जाता है। जबकि राखड़ की भी डिमांड रहती है। इसलिए इसका व्यापार व परिवहन रोजाना होता है। लेकिन परिवहन के दौरान भारी लापरवाही बरती जाती है। वाहनों में भूसा व राखड़ को सही तरीके से पैक नहीं किया जाता। वाहन से बाहर तक भरा जाता है। फटे पुराने तिरपाल से इन्हें ढका जाता है। जिससे परिवहन के दौरान रास्ते भर भूसा राखड़ उड़ते रहता है। इससे उक्त वाहन के पीछे वाहन चालकों विशेष कर दुपहिया चालकों व राहगीरों की आंखे में भूसा व राखड़ चला जाता है। जिससे उन्हें काफी पीड़ा होती है। आंखो को भी काफी नुकसान पहुंचता है। विडम्बना है कि मुख्य चौक चौराहो व मार्गो पर पुलिस के सामने से रोजाना ऐसी वाहने गुजरती है, लेकिन इन पर कार्रवाई नहीं की जाती। कई बार खुद पुलिसवाले ऐसी वाहनों के कारण आंख की पीड़ा झेल चुके है। लोगो ने चर्चा के दौरान बताया कि कई बार ऐसे राखड़ व भूसा वाहन दुर्घटनाओं के कारण भी बन चुके है। अचानक आंख में भूसा राखड़ चले जाने से दर्द चुभन के कारण वाहन चालकों का बैलेंस बिगड़ जाता है। और दुर्घटना हो जाती है।
आसानी से नहीं निकलता भूसा – राखड़
यदि आंख में सामान्य कचरा चला जाये तो सादे पानी से धोकर या फिर हाथ से ही कचरा निकाला जा सकता है। लेकिन भूसा या राखड़ आंख में जाते ही ज्यादातर पुतलियों से चिपक जाता है और दर्द व चुभन ज्यादा होता है। ऐसे में न चाहते हुए भी लोग आंख मसलने लग जाते है इसलिए आंखो की पुतलियों में खरोच आ जाती है। ऐसे में दर्द और बढ़ जाती है फिर डाक्टर के पास जाकर ही आंख से कचरा निकलवाना पड़ता है।

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