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सूरज की किरणों से बदल गई ज़िंदगी – ताराचंद की कहानी

*धमतरी 11 सितंबर 2025/- धमतरी जिले के चरमुड़िया गांव में सुबह का सूरज जैसे ही उगता है, उसकी सुनहरी किरणें सिर्फ खेतों और आँगन को ही नहीं, बल्कि श्री ताराचंद साहू के सपनों को भी रोशन कर देती हैं। पहले हर महीने बिजली का बिल 1500–2000 रुपये तक आ जाता था। खेती-किसानी करने वाले ताराचंद के लिए यह खर्च बोझ जैसा था। लेकिन आज वही सूरज उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया है।*

*नई उम्मीद की शुरुआत*

*जब प्रधानमंत्री सूर्यघर-मुफ़्त बिजली योजना की जानकारी मिली, तो ताराचंद ने जोखिम उठाकर इसे अपनाने का फैसला किया। उन्होंने अपने घर की छत पर 3 किलोवाट का रूफटॉप सोलर पैनल लगवाया। कुल लागत भले 2 लाख रुपये रही हो, लेकिन सरकार से मिली 78 हजार रुपये केंद्र से और 30 हजार रुपये राज्य से सब्सिडी ने उनके बोझ को हल्का कर दिया।*

*खुशियों का उजाला*

*आज हालात पूरी तरह बदल गए हैं। बिजली बिल, जो कभी चिंता का कारण था, अब शून्य हो चुका है। इतना ही नहीं—नेट मीटरिंग से अतिरिक्त बिजली बेचकर ताराचंद को आय का भी साधन मिल गया है। यह राहत उनके चेहरे की मुस्कान में साफ झलकती है।*

*ताराचंद कहते हैं कि बिजली खर्च से छुटकारा ही नहीं मिला, बल्कि हमें यह गर्व भी है कि हम स्वच्छ और हरित ऊर्जा अपनाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए अच्छा वातावरण बना रहे हैं।*

*योजना के बड़े फायदे*ऑनलाइन पंजीयन और पारदर्शी प्रक्रिया। पंजीकृत वेंडर से संयंत्र की स्थापना।सत्यापन के बाद सब्सिडी सीधे बैंक खाते में और कम ब्याज दर (7%) पर ऋण सुविधा भी उपलब्ध।*

*समाज पर असर*

*यह योजना सिर्फ ताराचंद के घर की कहानी नहीं है। यह एक परिवर्तन की शुरुआत है| गांवों में अब लोग हरित ऊर्जा की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कार्बन उत्सर्जन घट रहा है और स्वच्छ पर्यावरण को बढ़ावा मिल रहा है। परिवार ऊर्जा आत्मनिर्भर बनकर जीवन की नई राह पर बढ़ रहे हैं।*

*प्रेरणा की मिसाल*

*ताराचंद की सफलता यह साबित करती है कि जब सरकार की योजनाएँ ईमानदारी से लागू होती हैं और लोग आगे बढ़कर उनका लाभ उठाते हैं, तो बदलाव संभव है। सूरज की यही रोशनी अब धमतरी में कई घरों को जगमगाने लगी है और आने वाले कल को हरा-भरा बनाने की ओर अग्रसर है।*

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

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