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खरीफ 2026 की तैयारी पूरी : खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता से किसानों को मिलेगी समय पर सुविधा

कलेक्टर के मार्गदर्शन में उर्वरक वितरण व्यवस्था सुदृढ़, कालाबाजारी रोकने विशेष निगरानी दल सक्रिय

धमतरी- आगामी खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग द्वारा किसानों को समय पर खाद एवं बीज उपलब्ध कराने के लिए व्यापक तैयारियां सुनिश्चित की गई हैं। किसानों की जरूरतों और किसान संगठनों द्वारा व्यक्त चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए जिले में उर्वरक एवं बीज के भंडारण, वितरण और निगरानी व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया गया है, ताकि खेती-किसानी के कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सकें।

कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले की 43 सहकारी समितियों में अब तक 3090.30 क्विंटल बीज का भंडारण किया जा चुका है। वहीं सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में कुल 29,113.70 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराया गया है। इसमें यूरिया, डीएपी सहित अन्य आवश्यक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण शामिल है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि किसानों की मांग के अनुरूप बीज एवं उर्वरक उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे किसानों को समय पर और उचित मूल्य पर सामग्री प्राप्त हो सके।उर्वरक वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता और सुगमता बनाए रखने के लिए सहकारी समितियों के साथ-साथ निजी उर्वरक एवं बीज विक्रेताओं की भी नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। किसानों को नजदीकी स्तर पर आसानी से खाद-बीज उपलब्ध हो, इसके लिए निजी विक्रेताओं के माध्यम से भी पर्याप्त मात्रा में सामग्री उपलब्ध कराई गई है।
जिले में खाद एवं बीज की कालाबाजारी तथा नकली उत्पादों पर रोक लगाने के उद्देश्य से जिला स्तर पर विशेष जांच दल गठित किए गए हैं। मैदानी, विकासखंड एवं जिला स्तर के निरीक्षकों द्वारा निरंतर निगरानी की जा रही है तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
वैश्विक परिस्थितियों एवं उर्वरकों की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन द्वारा वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं। कलेक्टर के मार्गदर्शन में किसानों को नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हो सके और आवश्यकता पड़ने पर किसानों को वैकल्पिक विकल्प उपलब्ध रहें।
इसके साथ ही कृषि विभाग द्वारा टिकाऊ एवं संतुलित खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हरी खाद के रूप में मूंग एवं ढैंचा फसल को प्रोत्साहित किया जा रहा है। नील हरित काई, गोबर कंपोस्ट तथा वर्मी कंपोस्ट के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए वर्तमान में आयोजित सुशासन तिहार एवं विकसित कृषि संकल्प अभियान के शिविरों के माध्यम से किसानों को जागरूक किया जा रहा है। इससे रासायनिक उर्वरकों की उपयोगिता में कमी लाने और भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने में सहायता मिलेगी।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत केंद्रों से ही खाद एवं बीज क्रय करें तथा कृषि वैज्ञानिकों द्वारा निर्धारित संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करें। किसी भी प्रकार की अनियमितता अथवा शिकायत की सूचना तत्काल कृषि विभाग अथवा जिला नियंत्रण कक्ष को देने का आग्रह भी किया गया है।जिले के किसान संगठनों ने प्रशासन द्वारा समय रहते किए गए इन प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया है कि इस खरीफ सीजन में किसानों को खाद-बीज की उपलब्धता को लेकर किसी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।

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