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फिर लबालब हुआ माडमसिल्ली बांध, खुले ब्रिटिश शासन काल में बने एशिया का इकलौता सायफन सिस्टम वाले गेट


धमतरी। बंगाल के खाड़ी में बने कम दबाव वाले सिस्टम के कारण प्रदेश भर में मानसूस एक बार फिर सक्रिय हो गया है। जिसका असर धमतरी जिले के जलाशयो में भी नजर आ रहा है। जिले के माडमसिल्ली बांध क्षेत्र में हुई अच्छी वर्षा के चलते बांध एक बार फिर छलकने लगा है। जिसके चलते बांध के आटोमेटिक सायफन सिस्टम वाले गेट खुल गये है।
धमतरी में हुई अच्छी वर्षा के कारण ब्रिटिश शासन काल में बना एशिया का इकलौता सायफन सिस्टम बांध पूरी तरह से लबालब हो गया है. बांध के गेट खुलते ही सैलानियों का आना शुरू हो गया है. माडमसिल्ली बांध के गेट ऑटोमैटिक खुलते हैं, जब बांध में पानी एक निश्चित स्तर से ऊपर भर जाता है और पानी को बाहर निकालने के लिए साइफन सिस्टम के 4 बेबी साइफन गेट स्वचालित रूप से खुल जाते हैं। अगर जलस्तर ज्यादा रूप से बढ़ता है, तो 32 अन्य गेट भी स्वत: खुल जाते हैं और जैसे ही जलस्तर खतरे के स्तर से नीचे आता है, ये गेट भी अपने आप बंद हो जाते हैं। इस बांध की ऑटोमैटिक साइफन इंजीनियरिंग 100 साल से ज्यादा पुरानी होने के बावजूद आज भी उत्कृष्ट मानी जाती है और इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ाई जाती है।माडमसिल्ली बांध गंगरेल बांध का सहायक बांध है और रविशंकर सागर परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके पानी से धमतरी जिले की सिंचाई होती है और भिलाई, रायपुर व धमतरी शहर को पेयजल आपूर्ति भी होती है। माडम सिल्ली बांध की क्षमता 5.839 टीएमसी पानी की है। बता दे कि आज बेबी व मुख्य सायफन गेट सहित सभी खुले। इस सीजन में यह दूसरी बार जब माडमसिल्ली बांध के सायफन सिस्टम वाले गेट खुले है।

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