निलंबित शिक्षक की बहाली का आदेश जारी,विधायक ओंकार साहू ने किया था निलंबन का पुरजोर विरोध

कुरूद विकासखंड के शासकीय नवीन प्राथमिक शाला नारी के सहायक शिक्षक ढालूराम साहू को केवल व्हाट्सऐप स्टेटस में बच्चों को समय पर किताबें न मिलने की समस्या उठाने पर निलंबित किया जाना प्रदेशभर में चिंता का विषय बना हुआ था।
इस कार्रवाई पर धमतरी के विधायक ओंकार साहू ने मुखर होकर आपत्ति दर्ज की तथा इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार बताया।विधायक साहू की तीखी प्रतिक्रिया, लगातार दबाव और शिक्षकों के विरोध के बाद ही शिक्षा विभाग हरकत में आया और निलंबन आदेश समाप्त करने का निर्णय लिया।विधायक ओंकार साहू ने कहा एक शिक्षक का प्रथम दायित्व बच्चों की शिक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा करना है। यदि किताबें समय पर नहीं पहुंचीं और उसने इस मुद्दे को समाज के सामने रखा, तो यह कदाचार नहीं बल्कि जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का परिचय है। विभाग को शिक्षक को दंडित करने के बजाय यह समझना चाहिए कि देरी क्यों हुई और बच्चों को किताबें समय पर क्यों नहीं मिलीं।उन्होंने आगे कहा पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार का उद्देश्य सदैव शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और शिक्षकों को सम्मान देना रहा है। लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार की ऐसे दमनात्मक कार्रवाइयाँ न केवल शिक्षकों का मनोबल तोड़ती हैं बल्कि बच्चों की शिक्षा पर भी प्रतिकूल असर डालती हैं।विधायक साहू ने जिला शिक्षा अधिकारी को यह भी निर्देश दिया था कि मामले की निष्पक्ष जांच कर शिक्षक को तत्काल न्याय दिलाया जाए, क्योंकि यह मामला अनुशासनहीनता का नहीं बल्कि प्रणाली की खामियों को उजागर करने का साहस था।लगातार विरोध, मीडिया की भूमिका और विशेष रूप से विधायक ओंकार साहू द्वारा उठाए गए कठोर सवालों का प्रभाव अंततः दिखाई दिया।शिक्षा विभाग ने निलंबन आदेश रद्द करते हुए शिक्षक ढालूराम साहू को पुनः उसी विद्यालय में बहाल कर दिया है।यह निर्णय न केवल एक शिक्षक के सम्मान की बहाली है, बल्कि यह भी सिद्ध करता है कि जब जनप्रतिनिधि दृढ़ता से आवाज उठाते हैं, तो व्यवस्था बदलने के लिए बाध्य हो जाती है।