सतनामी समाज के नेतृत्व में धूमधाम से निकली सतनाम संदेश यात्रा
बाबा गुरु घासीदास जी का संदेश मनखे-मनखे एक समान आज के समय में और भी प्रासंगिक है-कोमल संभाकर

धमतरी। शहर में बाबा गुरु घासीदास जी की जयंती के पावन अवसर पर एक दिन पूर्व सतनामी समाज के नेतृत्व में सतनामी समाज द्वारा भव्य सतनाम संदेश यात्रा का आयोजन किया गया। यह यात्रा पूरे शहर में श्रद्धा, उत्साह और सामाजिक एकता का संदेश देती नजर आई। यात्रा में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी रही और पूरा वातावरण जय सतनाम के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।सतनाम संदेश यात्रा की शुरुआत आधारी नवागांव जैतखंभ में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके पश्चात यात्रा विभिन्न वार्डों से निकलते हुए शहर के प्रमुख मार्गों से होकर आगे बढ़ी। अलग-अलग वार्डों से आए समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा, आकर्षक झांकियों और डीजे-धुमाल की धुन पर थिरकते हुए अपने-अपने मोहल्लों से यात्रा में शामिल हुए।यात्रा घड़ी चौक में विभिन्न वार्डों से आई झांकियों के एकत्रित होने के बाद भव्य शोभायात्रा का रूप लेती हुई। सदर बाजार मार्ग से होकर निकली और अंततः विंध्यवासिनी मंदिर के पास समापन हुआ। पूरे मार्ग में अनुशासन, श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।इस अवसर पर प्रदेश युवा प्रमुख कोमल संभाकर ने कहा कि बाबा गुरु घासीदास जी का संदेश मनखे-मनखे एक समान आज के समय में और भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि सतनाम संदेश यात्रा का उद्देश्य समाज में समानता, भाईचारे, नशामुक्ति और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देना है। युवा सतनामी समाज लगातार बाबा साहेब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है और आगे भी सामाजिक सुधार की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएगा।वहीं युवा सतनामी समाज धमतरी के विनोद डिंडोलकर ने कहा कि सतनाम संदेश यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने का माध्यम है। बाबा गुरु घासीदास जी के आदर्शों पर चलकर ही एक समतामूलक, शिक्षित और संगठित समाज का निर्माण संभव है। उन्होंने यात्रा में शामिल सभी वार्डवासियों, युवाओं और मातृशक्ति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में एकता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करते हैं।सतनाम संदेश यात्रा के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने में स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यात्रा में बड़ी संख्या में युवाओं, बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों की सहभागिता ने इसे ऐतिहासिक और यादगार बना दिया। इस दौरान आर पी संभाकर, मुकेश बघेल,हेमंत बंजारे,राहुल गायकवाड़,मोहन महिलांगे,हीरा गायकवाड़,सागर गायकवाड़,धनेश्वर नवरंगे,दूषण जोशी,कुशल मार्कण्डेय,यशवंत जांगड़े, अजय डहरिया,चंदू बंजारे,देव कुर्रे, हेमंत कुर्रे, पंकज, संभाकर, राजा संभाकर,राजा बंजारे,, टुपेंद्र विजय सोनवानी,इतवारी गावस्कर,चंद्र प्रकाश पाटले, लोकेश लहरें, दीपचंद भारती, मनोज खरे, योगेश डहरिया, देव कुर्रे, कुशल डिंडोलकर, आकाश बंजारे, लोकेश गायकवाड़, भूपेंद्र भारती, अर्जुन सोनवानी, बुधराम टंडन आदि मौजूद रहे।
