कवयित्री अनामिका अंबर की रचनाओं ने न केवल आध्यात्मिक चेतना को जागृत किया, बल्कि समाज को संस्कार, नैतिकता और कर्तव्य के पथ पर अग्रसर होने की भी दी प्रेरणा
काव्य पाठ ने श्रोताओं को किया भावविभोर, हर पंक्ति पर तालियों और जयघोष की सुनाई देती रही गूंज
श्री राम कथा के कथावाचक पं. अतुल कृष्ण भारद्वाज सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक बने साक्षी

धमतरी । धर्म, आस्था, भक्ति और भारतीय संस्कृति के गौरवशाली संस्कारों से सराबोर वातावरण में श्री राम कथा के पावन अवसर पर आयोजित श्री राम भक्ति की काव्यमयी संध्या नगर के धार्मिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गई। यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि रामभक्ति, काव्य और जीवन मूल्यों का ऐसा दिव्य संगम बना, जिसने उपस्थित प्रत्येक श्रद्धालु के हृदय को स्पर्श किया। आयोजन स्थल पर सायंकाल से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। वातावरण में दीपों की आभा, पुष्पों की सुगंध और श्रीराम के जयघोष से आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो रहा था। जैसे ही कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ, संपूर्ण परिसरजय श्री राम, जय सियाराम के गगनभेदी उद्घोष से गूंज उठा और उपस्थित जनसमूह भक्तिरस में डूब गया। कवि सम्मेलन के श्री राम कथा के कथावाचक पं. अतुल कृष्ण भारद्वाज सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक साक्षी बने। इस दिव्य अवसर पर सुप्रसिद्ध कवयित्री अनामिका अंबर जी ने अपनी सुमधुर, प्रभावशाली और ओजस्वी वाणी से मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों, त्याग, मर्यादा, करुणा, सेवा और धर्म के शाश्वत मूल्यों को काव्यात्मक रूप में जीवंत कर दिया। उनकी प्रत्येक कविता में भक्ति रस, वीर रस और करुण रस का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। उनके काव्य पाठ ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया और हर पंक्ति पर तालियों और जयघोष की गूंज सुनाई देती रही। कवयित्री अनामिका अंबर जी की रचनाओं ने न केवल आध्यात्मिक चेतना को जागृत किया, बल्कि समाज को संस्कार, नैतिकता और कर्तव्य के पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा भी दी। उनके काव्य में श्रीराम को केवल आराध्य ही नहीं, बल्कि आदर्श जीवन पुरुष के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिससे श्रोताओं ने अपने जीवन में राम के आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। देर रात तक चले इस काव्य पाठ के दौरान श्रोतागण मंत्रमुग्ध होकर कार्यक्रम से जुड़े रहे। इस अवसर पर कवि प्रख्यात मिश्रा ने अपने ओजपूर्ण कविता से लोगों में जोश भर दिया। देशभक्ति की कविताओं से लोग ओतप्रोत हो गए। इस भव्य आयोजन के सफल संचालन और ऐतिहासिक स्वरूप के पीछे आयोजक पं. राजेश शर्मा का कुशल नेतृत्व और समर्पित प्रयास विशेष रूप से उल्लेखनीय रहे। उनके मार्गदर्शन में संपूर्ण कार्यक्रम अत्यंत सुव्यवस्थित, अनुशासित और गरिमामय ढंग से संपन्न हुआ। आयोजन की प्रत्येक व्यवस्था—मंच संचालन, ध्वनि, प्रकाश, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा—उच्च स्तर की रही, जिसकी सभी ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की। कार्यक्रम में नगर के गणमान्य नागरिक, समाजसेवी, साहित्यकार, जनप्रतिनिधि, धर्मप्रेमी बंधु एवं बड़ी संख्या में काव्य रसिक उपस्थित रहे। सभी ने इस आयोजन को नगर के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। आयोजन स्थल को भव्य धार्मिक सजावट से सजाया गया था, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन समाज में संस्कारों के संरक्षण, युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोडऩे में निभाते हैं महत्वपूर्ण भूमिका – पं. राजेश शर्मा
समापन अवसर पर आयोजक पं. राजेश शर्मा द्वारा कवयित्री अनामिका अंबर का शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन समाज में संस्कारों के संरक्षण, युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोडऩे तथा आध्यात्मिक चेतना के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को निरंतर आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। कुल मिलाकर रामभक्ति, काव्य, संस्कृति और संस्कारों से सजी यह काव्यमयी संध्या श्रद्धा, आनंद और प्रेरणा का अनुपम संगम सिद्ध हुई, जिसने नगरवासियों के मन-मस्तिष्क पर अमिट छाप छोड़ी और लंबे समय तक स्मृतियों में जीवित रहेगी।