छेरछेरा पर बच्चों ने घर-घर जाकर मांगा अन्नदान
क्षेत्र में हर्षोल्लास से मनाया जा रहा पारम्परिक लोकपर्व छेरछेरा

धमतरी। आज छेरछेरा पर्व पर बच्चों द्वारा अन्नदान लेकर उक्त महापर्व की परम्परा को पूर्ण किया गया। आज सुबह से बच्चों की टोली घर-घर दस्तक देकर पापंररिक गीत गाते हुए छेरछेरा मांग रहे है। छत्तीसगढ़ में छेरछेरा पर्व का अपना अलग ही महत्व है. सदियों से मनाया जाने वाला यह पारंपरिक लोकपर्व आज भी अलौकिक है. इस तरह यह पर्व छेरछेरा पुन्नी पौष माह की शुक्ल पक्ष को पन्द्रहवी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन अपने दोस्तों के साथ समूह में लोगों के घरों में दस्तक देते हैं. जहां वे पारंपरिक गीत छेरी के छेरा छेरछेरा गाते हुए दान मांगते हैं. इसके एवज में लोगों द्वारा चावल, धान सहित अन्य सामग्री भेंट स्वरूप प्रदान किया जाता है. इसे एकत्र कर कुछ बच्चे एक जगह भोजन बनाकर उसे ग्रहण कर पर्व की खुशियां आपस में बाटते हैं. तो कुछ बच्चे उसकी बिक्री कर अपने लिये जरूरत की सामाग्री लेते हैं. वहीं बच्चों के अलावा कुछ क्षेत्रों में बड़ों द्वारा भी समूह बनाकर भजन-कीर्तन करते हुए अन्नदान मांगा जाता है. इस तरह उक्त पर्व को लेकर सभी वर्ग में उत्साह देखते ही बनता है.
छेरछेरा पर पुण्य स्नान से होते है रोग, दुख व दरिद्रता दूर
ज्ञात हो कि पौष पूर्णिमा को ही छेरछेरा पुन्नी कहते हैं. इसे एक पर्व के रूप में मनाया जाता है. इस दिन नदी तालाब एवं अन्य स्थलों पर अलसुबह पुण्य स्नान करने से रोग, दुख एवं दरिद्रता दूर होती है. साथ ही पाप का विनाश होता है. इस दिन किये जाने वाले दान को महादान माना गया है. साथ ही इसी दिन माता शाकंभरी देवी की जयंती मनाई जाती है. जो कि माता दुर्गा का ही एक रूप है. जो हरी सब्जी एवं शुद्ध शाकाहारी भोग स्वीकार करती है।
छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति का प्रतिबिंब है छेरछेरा पर्व
छेरछेरा पर्व छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति का प्रतिबिंब है। यह पर्व समाज में परोपकार, सामूहिकता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता को दर्शाता है। फसल कटाई का उत्सव: छेरछेरा पर्व नई फसल के आगमन का जश्न है। यह किसानों के जीवन में एक महत्वपूर्ण समय होता है, जब खेतों से धान की फसल घर में सुरक्षित हो जाती है। इस दिन घरों में नये चावल के पारम्परिक व्यंजन बनाए, खाये जाते हैं। सामाजिक समरसता: यह पर्व समाज के सभी वर्गों को एकजुट करता है। लोग अपनी खुशी और संसाधन दूसरों के साथ साझा करते हैं। प्रकृति और देवताओं का सम्मान: छेरछेरा पर्व के दौरान ग्राम देवताओं और प्रकृति का धन्यवाद किया जाता है, जिससे यह पर्व धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो जाता है।