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रैन बसेरा में 50 रुपये में रुकने और 50 रुपये में खाने की है अच्छी व्यवस्था फिर भी घट रही संख्या

पहले 30 रुपये था चार्ज, 1 जनवरी से बढ़ाकर किया गया 50 रुपये फिर भी संचालन समूह जा रही नुकसान में

24 घंटे समूह की महिलाएं देती है रैन बसेरा में समय, निगम कर रही पारिश्रमिक की मांग

धमतरी । लगभग 9 वर्ष पूर्व शहर में रात गुजारने सस्ती व अच्छी व्यवस्था की कमी महसूस हो रही थी। जिसे ध्यान में रखते हुए नगर निगम के नये बस स्टैण्ड में रैन बसेरा की शुरुआत की। जिससे यह समस्या दूर हो गयी है। यहां होटलों की तुलना में काफी कम दाम पर रुकने की बेहतर व्यवस्था प्रदान की जा रही है। बाउजूद इसके यह लोगो की संख्या कम हो जाती है जिससे संचालन समिति को नुकसान हो रहा है।
ज्ञात हो कि 27 फरवरी 2017 को रैन बसेरा शुरु हुआ था। जिसे अब लगभग 9 वर्ष होने को है। शुरुआत में रैन बसेरा में रुकने का चार्ज प्रति व्यक्ति 20 रुपये निर्धारित किया गया था। जिसे कुछ सालो बाद बढ़ाकर 30 रुपये किया गया। जिसे अब एक जनवरी 2026 से बढ़ाकर 50 रुपये किया गया है। जिसके एवज में हॉल में सिंगल बेड प्रदान की जाती है। साथ ही लेट बाथ की सुविधा उपलब्ध है। यहां महिलाओं की ठहरने की भी व्यवस्था है। रैन बसेरा का संचालन करने वाली समूह मां सावित्री बाई फूले एरिया लेवल फेडरेशन की अध्यक्ष सुभद्रा टंडन, सचिव आशा बंजारे, सदस्य साजना लहरे, गौरी खिलाड़ी, संतोषी बंजारे ने बताया कि 24 घंटे रैन बसेरा में समूह की महिलाएँ ड्यूटी देती है। लेकिन यहां रुकने वालो की संख्या कम रहती है उससे कम तो यहां के केंटीन में खाने वालो की संख्या है। ऐसे में समूह लाभ अर्जित नहीं कर पा रहा है। सफाई कर्मचारी सहित 7 से 8 महिलाएं रैन बसेरा में कार्यरत है। ऐसे में महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुधारने निगम द्वारा ध्यान देने की मांग समूह द्वारा की गई है।
बता दे कि रैन बसेरा में रुकने के लिए आधार कार्ड की जानकारी ली जाती है। पिछले महीने दिसम्बर 2025 में 544 लोग यहां ठहरे। वहीं जनवरी के शुरुवाती 6 दिनों में 116 लोग ठहरे। समिति की महिलाओं ने कहा कि ठंड के दो महीनों में रुकने वालों की संख्या अपेक्षाकृत थोडी ज्यादा होती है। अन्य दिनों में औसतन 8-10 लोग ही यहां रोजाना पहुंचते है।
बाहर जगह मिले तो बढ़ेगा कार्य

इसके अतिरिक्त 50 रुपये में यहां भोजन बनाकर दिया जाता है जिसमें 3 रोटी, चावल, दाल, सब्जी, आचार, पापड़, सलाद दिया है। बाउजूद इसके यहां खाने वालों की संख्या बहुत ही कम है। रैन बसेरा में बाहर के लोगो के लिए खाने की व्यवस्था है लेकिन लोग भीतर पहुंचते ही नहीं है।चूंकि रैन बसेरा अंदर पड़ता है इसलिए अधिकांश लोग पहुंच नहीं पाते। ऐसे में समिति द्वारा बाहर केंटीन संचालन के लिए जगह की मांग किया जा रहा है।
30 बेड की है व्यवस्था
रैन बसेरा में तीस बेड की व्यवस्था है। एक समय पर तीस लोग को एक साथ ठहराया जा सकता है। लेकिन महिला व पुरुष अलग-अलग ठहरने का प्रावधान है। इसलिये कई दपत्ति रैन बसेरा में नहीं ठहरते। हालांकि महिलायें काफी कम ही रैन बसेरा में रुकती है।
लॉकर सुविधा की है कमी
रैन बसेरा में ठहरने वाले लोगो से उनकी व्यवस्था के संबंध में पहले राय भी दर्ज करायी जाती थी। जो कि अब नहीं हो रहा है। लेकिन यहां रुकने वाले ज्यादा लोगो द्वारा रैन बसेरा की व्यवस्था पर संतुष्टि जताई गई है और अधिकांश लोगो द्वारा यहां अपने सामान रखने लॉकर की कमी बताई है। वर्तमान में रैन बसेरा में कूलर की भी व्यवस्था है रोजाना यहां सफाई कराई जाती है।
समूह को उठाना पड़ता है मेंटेनेंस का खर्च
समूह की महिलाओं ने बताया कि वे निगम द्वारा उन्हें कोई आर्थिक सहयोग नहीं मिलता यहां तक की यहां मेंटेनेंस कार्य भी समूह को करना पड़ता है। सदस्य साजना लहरे, गौरी खिलाड़ी ने बताया कि हाल ही में लगभग 20 हजार की लागत से एक लोहे का मजबूत दरवाजा लगाना पड़ा। ऐसे ही कई छुटपुट मेंटेनेस खर्च होते रहते है जो उन्हें भारी पड़ता है।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

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