जिसके अंदर कोई अहंकार ना रह जाए वही भक्ति का दर्शन कर पाएगा – श्री संकर्षण शरण जी

धमतरी। रुद्री रोड हनुमान मंदिर में चल रही हनुमान कथा में परम पूज्य गुरुदेव श्री संकर्षण शरण जी (गुरुजी) ने हनुमान जी की महिमा का वर्णन करते हुए आज सुंदरकांड की कथा बताएं, गुरुजी बताएं कि भक्ति का दर्शन होना चाहिए प्रदर्शन नहीं,जिसके अंदर कोई अहंकार बिल्कुल ना रह जाए वही भक्ति का दर्शन करेगा किंतु आज समाज में भक्ति का प्रदर्शन बहुत ज्यादा हो रहा है इस भक्ति के प्रदर्शन के कारण भक्ति का दर्शन नहीं हो पा रहा है लोग अपने को ही दिखाने में लगे रह जा रहे हैं अपना प्रदर्शन करने में लग जा रहे हैं , और भक्ति से दूर होते जा रहे हैं। हनुमान जी मसक समान हो जाते हैं। हम ना दिखे सीता जी दिख जाए, यह शिक्षा देते हैं कि सब कुछ करते हुए कर्तापन का बोध ना हो, हमेशा अपने को छोटा बना कर रखें। हनुमान जी कहते हैं कि जब अपने जीवन को जीना हो तो आप छोटे बन के ,बड़े बनाकर बराबरी बनाकर के अलग-अलग रहकर के जिओ अलग-अलग रहो अपना अपना कार्य करो यह अंगूठा अपना काम करता है उंगलिया अलग काम करता है किंतु जब हमारे समाज पर आवश्यकता पड़ जाए, हमारे संस्कारों पर पड़ जाए हमारे देश के भौगोलिक सीमाओं पर पड़ जाए हमारे धर्म पर पड़ जाए हमारे भगवान पर पड़ जाए तो फिर अलग-अलग रहने की आवश्यकता नहीं है फिर छोटे – बड़े अलग-अलग रहने वाले सब के सब एक हो जाओ। और यही एकता हमारी शक्ति होती है काफी संख्या में लोगों की भीड़ रही।
