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तालाबों में पहुंच रहा नालियों का गंदा पानी, गंदगी के चलते नहीं बचा निस्तारी योग्य

सरोवर, धरोहर योजना फाईलो तक सीमित, स्नान पर चर्म रोग का खतरा

पानी शुद्धि पर ध्यान नहीं सिर्फ बाहरी सौन्दर्यीकरण पर रहा फोकस

धमतरी । धमतरी शहर को पहले तालाबों का शहर भी कहा जाता था यहां तालाबों की अधिकता थी लेकिन अब कुछ तालाबों का हाल बदहाल है। निगम का फोकस तालाब के बाहर के सौन्दर्यीकरण पर रहा, लेकिन कभी भी तालाबों के पानी के शुद्धि पर ध्यान नहीं दिया गया नतजीन आज अधिकांश तालाबों का पानी उपयोग योग्य नहीं है। कई तालाब ऐसे है जहां सालों से नालियों का पानी पहुंच रहा है या कहे कि नालियों के पानी से ही यह तालाब लबालब रहते है. गंदा पानी तालाब में मिलने से तालाब का पानी भी गंदा हो चुका है। अधिकांश तालाबो ंका पानी मटमैला व गहरे हरे रंग का हो चुका है। जो कि उपयोग लायक नहीं रह गया है, पहले सरोवर धरोहर नारा देकर सरोवरो को संरक्षित व सुरक्षित करने की बाते कही गई थी लेकिन अब तक सिर्फ बाहरी सुंदरता पर ध्यान दिया गया है। भीतर के शुद्धिकरण से निगम दूर रही है। स्थिति यह है कि कुछ तालाबों जहां साल भर पानी रहता है वहां कई बार पानी से ही बदबू आने लगता है। ऐसे में जब लोग तालाब का उपयोग ही नहीं करेंगे तो बाहरी सुन्दरता पर लाखों करोड़ो खर्च करने का क्या औचित्य रह जाता है?
इन तालाबों में पहुंचता है गंदा पानी
वैसे तो शहर के अधिकांश तालाबों का पानी निस्तारी आदि के लिए अब उपयोगी नहीं रह गया है। सुबन तालाब, देवान तालाब, बनिया तालाब, आमातालाब, खोडिय़ा तालाब, कठौली तालाब, रामबाग तालाब, रानी तालाब सहित अन्य तालाबों का पानी गंदा हो चुका है। इसमें रमसगरी तालाब कठौली, खोडिय़ा तालाब, महिमा सागर तालाब, रामबाग तालाब सुभाष नगर का अटल सरोवर तालाब सहित कुछ अन्य तालाबों में नालियों का गंदा पानी पहुंचता है। जिससे इसके उपयोग से खुजली आंखो में जलन शरीर पर दाने आदि चर्म रोग की शिकायते लोग करते है।
पानी का शुद्धिकरण है जरुरी
तालाबों के पानी का शुद्धिकरण जरुरी है। इसके लिए तालाबों में केमिकल पाउडर फिटकरी आदि का छिड़काव किया जा सकता है। या फिर तालाबों को खाली कर नया पानी भरा जा सकता है। साथ सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के शुरु होने के बाद गंदे पानी को शुद्ध कर तालाबों में पहुंचा कर पुन: भरा जा सकता है। इससे तालाबों का अस्तित्व बचा रहेगा और सौन्दर्यीकरण के खर्च भी सार्थक होंगे
गंदे पानी के चलते शोक कार्यक्रमों में होती है स्नान परम्परा की औपचारिकता
हिन्दू रीति रिवाजो में शोक कार्यक्रमों में तालाब स्नान की परम्परा है जो कि आज भी जीवित है। लेकिन जब परिवार व सामाजिक जन तालाब स्नान की रस्म अदा करने पहुंचते है तो तालाब के गंदे पानी के कारण सिर्फ जल अर्पित कर शरीर पर कुछ छींटे मार कर औपचारिकता निभाई जाती है। कुछ परिवार द्वारा तो तालाब के पास टैंकर मंगवाया जाता है जिससे परिवार जन स्नान करते है।

”उक्त तालाबों में गंदा व कचरा जाने से रोकने के लिए जाली लगाए गए है। भविष्य में एसटीपी प्लांट के माध्यम से पानी को तालाबो में पहुंचाने की योजना है। ÓÓ
पीसी सार्वा
उपायुक्त नगर निगम धमतरी

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