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धमतरी में भाषाई संवर्धन की नई पहल : स्थानीय बोलियों के संरक्षण पर विशेष बल

छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा का प्रथम आगमन


धमतरी। जिला हिन्दी साहित्य समिति धमतरी के तत्वावधान में साहित्य भवन में आयोजित कार्यक्रम में राज्य राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने धमतरी प्रवास के दौरान क्षेत्र की स्थानीय बोलियों एवं भाषाओं के प्रचार-प्रसार तथा संवर्धन से जुड़े विविध कार्यक्रमों में सहभागिता निभाई। धमतरी प्रवास के दौरान अध्यक्ष ने सर्वप्रथम दिवंगत हास्य-व्यंग्य के प्रख्यात कवि एवं छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पूर्व सदस्य सुरजीत नवदीप के निवास पहुंचकर श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। उन्होंने स्व. नवदीप जी के साहित्यिक अवदान का स्मरण किया। विचार-विमर्श सत्र में अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि राज्य की आदिम एवं जनजातीय बोलियों का संरक्षण और संपोषण आयोग की प्राथमिकता में है। उन्होंने उल्लेख किया कि भतरी, दोरली हल्बी, गोंडी, छत्तीसगढ़ी और अन्य स्थानीय बोलियां केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं समृद्ध सांस्कृतिक इतिहास, लोकज्ञान और परंपराओं की संवाहक है। उन्होंने कहा कि इन बोलियों के समृद्ध इतिहास, लोककथाओं, गीतों, कहावतों और पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक पद्धतियों से संरक्षित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। आयोग लिपियों, पांडुलिपियों, पांडुग्रंथों तथा संबंधित साहित्यिक सामग्री के संकलन और डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और सुचारू बनाने हेतु योजना तैयार कर रहा है। इससे शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और साहित्यप्रेमियों को प्रामाणिक सामग्री उपलब्ध हो सकेगी। कार्यक्रम के दौरान अध्यक्ष ने शिक्षा के क्षेत्र में क्षेत्रीय भाषाओं के समावेश की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शक्ति संतुलन में बदलाव आ रहा है और एशियाई देशों की स्थिति निरंतर सुदृढ़ होती दिखाई दे रही है। भारतीय भाषाएं नए आत्मविश्वास के साथ उभर रही हैं। अध्यक्ष श्री मिश्रा ने आश्वासन दिया कि साहित्यकारों के साथ समन्वय स्थापित कर ठोस कार्ययोजना तैयार करेगा। इस अवसर पर मुख्य रुप से संदीप अग्रवाल रायपुर, जिला संगठक चन्द्रशेखर शर्मा, गोपाल शर्मा, मंजीत छाबड़ा, रंजीत छाबड़ा, डॉ. चन्द्रशेखर चौबे, सचिव डॉ. भूपेन्द्र सोनी, कामिनी कौशिक, माधुरी मारकंडेय, कुलदीप सिन्हा, राजेन्द्र प्रसाद सिन्हा, दीप शर्मा, नरेश चंद्र श्रोती, मोहम्मद तारिक, शैलेन्द्र चेलक, प्रेमशंकर चौबे उपस्थित थे।

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