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गर्मी बढऩे के साथ ही जंगलो में बढ़ा आगजनी का खतरा, विभाग द्वारा हो रहे सुरक्षा के उपाय

फायर लाईन बनाकर, जागरुकता कार्यक्रम के माध्यम से व फायर वाचर तैनात कर सख्त हिदायत देकर किया जा रहा आगजनी से बचाव का प्रयास

लोगों की लापरवाही, महुआ संग्रहण के लिए लगाये गये आग से जंगलों में ज्यादातर होती है आगजनी

धमतरी । गर्मी की शुरुवात हो चुकी है। मार्च माह के शुरुवात से ही तापमान में वृद्धि लगातार दर्ज की जा रही है। वर्तमान में पारा 38 डिग्री से ऊपर पहुंच गया है। जो कि तेजी से और बढ़ेगा। गर्मी के मौसम में आगजनी का खतरा काफी बढ़ जाता है। जंगलो में भी भीषण आगजनी का खतरा रहता है। एक तिनके के आग पकडऩे से बड़ा क्षेत्र आग की जद में आ जाता है ऐसे में आगजनी से बचाव हेतु सावधानी व उपाय आवश्यक है।
बता दे कि धमतरी जिला वनों से घिरा हुआ है। अधिकांश भू भाग पर वन है। ऐसे में वन विभाग द्वारा वनों को आग से बचाने विशेष प्रयास हर साल किये जाते है। इस साल भी प्रयास किये जा रहे है। ज्ञात हो कि जंगलो में आग लगने के कई कारण होते है। जिनमें सबसे प्रमुख कारण वनोपज या महुआ संग्रहण के लिए ग्रामीणों द्वारा वनो में आग लगाना है। चूंकि सूखे पत्तों में महुआ वनोपज नजर नहीं आता इसलिए बीनने में परेशानी होती है। ऐसे में सुविधा हेतु महुआ पेड़ के नीचे आग लगा दिया जाता है। जिससे आसानी से महुआ एकत्रित किया जाता है। इस दौरान हवा के साथ आग फैलने लगता है। और कई बार जंगल के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लेता है, वहीं बीड़ी, सिगरेट पीने के बाद कंही भी जंगलो या जंगल वाले मार्ग पर सड़क किनारे फेंक देने से भी आग फैलने का खतरा रहता है। कई बार कुछ लोगों द्वारा पिकनिक या इंजाय आदि हेतु जंगल या वनो के बीच खाना बनाकर खाया जाता है। इससे भी आग फैलने का खतरा रहता है। उक्त खतरे से बचने हेतु वन विभाग द्वारा फायर लाईन जंगल वाले मार्गो के किनारे बनाया जा रहा है। ताकि आग लगे भी तो सीमित दायरे में बुझ जाये, वहीं विभाग द्वारा फायर वाचर तैनात किया गया है। जो वनो में आग की स्थिति की निगरानी करते है। जागरुकता कार्यक्रम भी आयोजित कर ग्रामीणों को जागरुक किया जाता है। साथ ही जंगलो में आग न लगाने की सख्त हिदायत भी दी गई है। बताया जा रहा है कि यह दण्डनीय अपराध है।
थर्मल ड्रोन से निगरानी

उदंती सीतानदी टायगर रिजर्व क्षेत्र के उपनिदेशक वरुण जैन के प्रयासों से एक उन्नत तकनीक का थर्मल ड्रोन विभाग से मिला है। जिससे 5 से 10 किमी दूर तक थर्मल स्कैन कर आग का पता लगाया जा सकता है। इससे आगजनी को समय रहते बुझा कर पूरे क्षेत्र में फैलने से रोका जा सकता है। थर्मल ड्रोन की मद्द से उदंती सीतानदी टायगर रिजर्व क्षेत्र में न सिर्फ वनों को सुरक्षित रखा जा सकता है बल्कि जंगली जीव जंतुओं की सुरक्षा भी पुख्ता हो पा रही है।

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