पूर्व विधायक लेखराम साहू ने अक्षय तृतीया पर्व की दी बधाई एवं शुभकामनायें

पूर्व विधायक लेखराम साहू ने अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया) का पावन पर्व की बधाई एवं शुभकामनायें देते हुए कहा कि मुख्य रूप से सनातन धर्म में अनंत पुण्य, सौभाग्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए मनाया जाता है। अक्षय का अर्थ है- जो कभी कम न हो या जिसका, क्षय न हो। मान्यता है कि इस दिन किए गए दान, तप और जप का फल अनंत काल तक बना रहता है, इसलिए यह नई शुरुआत, शादियों और सोने की खरीदारी के लिए सबसे उत्तम दिन माना जाता है।
इसी दिन किसान फसल बीज को पूजा अर्चना कर खेत में बोते है इसी दिन से किसान का नया वर्ष शुरू हो जाता है छत्तीसगढ़ में इसे अक्ति का त्योहार कहा जाता है.अक्षय तृतीया मनाने के प्रमुख पौराणिक और धार्मिक कारण है. इस दिन त्रेता युग का आरंभ हुआ था, और सतयुग का भी समापन माना जाता है।भगवान परशुराम जयंती: भगवान विष्णु के छठे अवतार, भगवान परशुराम का जन्म इसी तिथि को हुआ था, जिसे परशुराम जयंती के रूप में मनाया जाता है।अक्षय पात्र की प्राप्ति: महाभारत काल में इसी दिन पांडवों को सूर्यदेव से ‘अक्षय पात्र’ प्राप्त हुआ था, जिसमें कभी भोजन खत्म नहीं होता था।
मान्यता है कि इसी दिन से बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलते हैं।वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में साल में सिर्फ एक बार (अक्षय तृतीया को) ही भगवान के चरणों के दर्शन होते हैं।वेदव्यास जी ने महाभारत लिखना शुरू किया था।मैं छत्तीसगढ़ वासियों को छत्तीसगढ़ के पारंपरिक त्योहार अक्ति की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूं एवं उनके आने वाले वर्ष में फसल की उत्पादन में वृद्धि हो ऐसा भगवान से कामना करता हूं.
