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मोदी सरकार ने मनरेगा की मूल आत्मा को ही ख़त्म कर श्रमिकों से काम का अधिकार छिना है- राजेंद्र तिवारी

केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा कानून में किए गए बदलाव को लेकर कांग्रेस द्वारा प्रस्तावित मनरेगा बचाव संग्राम के तहत राजीव भवन मे ली प्रेसवार्ता

केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा कानून में किए गए बदलाव को लेकर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा प्रस्तावित मनरेगा बचाव संग्राम के तहत आयोजित होने वाली चरणबद्ध आंदोलन एवं अन्य विषयों को लेकर आज मुख्यवक्ता के रूप मे वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजेंद्र तिवारी द्वारा पत्रकारों से चर्चा की.श्री तिवारी ने कहा कि मोदी सरकार ने मनरेगा की मूल आत्मा को ही खत्म करके श्रमिकों से काम का अधिकार छीना है.मनरेगा कानून में परिवर्तन मोदी सरकार का श्रमिक विरोधी कदम है। यह महात्मा गांधी के आदशों पर कुठाराघात है, मजदूरों के अधिकारों को सीमित करने वाला निर्णय है।
मोदी सरकार ने ‘सुधार’ के नाम पर झांसा देकर लोकसभा में एक और बिल पास करके दुनिया की सबसे बड़ी रोज़गार गारंटी स्कीम मनरेगा को खत्म कर दिया है। यह महात्मा गांधी की सोच को खत्म करने और सबसे गरीब भारतीयों से काम का अधिकार छीनने की जान-बूझकर की गई कोशिश है।
अब तक, मनरेगा संविधान के आर्टिकल 21 से मिलने वाली अधिकारों पर आधारित गारंटी थी। नया फ्रेमवर्क ने इसे एक कंडीशनल, केंद्र द्वारा कंट्रोल की जाने वाली स्कीम में बदल दिया है।मनरेगा गांधी जी के ग्राम स्वराज, काम की गरिमा और डिसेंट्रलाइज्ड डेवलपमेंट के सपने का जीता-जागता उदाहरण था, लेकिन इस सरकार ने न सिर्फ उनका नाम हटा दिया है, बल्कि 12 करोड़ मनरेगा मज़दूरों के अधिकारों को भी बेरहमी से कुचला है। दो दशकों से, मनरेगा करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए लाइफलाइन रहा है और कोविड-19 महामारी के दौरान आर्थिक सुरक्षा के तौर पर ज़रूरी साबित हुआ है।अब तक मनरेगा मजदूरों को काम देने का कानून था, श्रमिक अधिकार पूर्वक मांग करते थे, जिसे योजना में परिवर्तित कर दिया गया, अब इसे चलाना नहीं चलाना सरकार की मर्जी पर निर्भर होगा।
श्री तिवारी ने आगे कहा कि मनरेगा के तहत, सरकारी ऑर्डर से कभी काम नहीं रोका गया। नया सिस्टम हर साल तय टाइम के लिए जबरदस्ती रोज़गार बंद करने की इजाजत देता है, जिससे राज्य यह तय कर सकता है कि गरीब कब कमा सकते हैं और कब उन्हें भूखा रहना होगा। एक बार फंड खत्म हो जाने पर, या फसल के मौसम में, मज़दूरों को महीनों तक रोज़गार से दूर रखा जा सकता है।मनरेगा केंद्रीय कानून था, 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार द्वारा भेजे जाते थे, अब केंद्र और राज्य का हिस्सा 60-40 का हो जाएगा, पहले मैचिंग ग्रांट 50 प्रतिशत राशि राज्य जमा करेगी तब केंद्र सरकार राशि जारी करेगा, राज्यों की वित्तीय स्थिति सर्वविदित है। इस बिल से आने वाले समय में मनरेगा स्कीम खत्म हो जाएगी। जैसे ही बजट का बोझ राज्य सरकारों पर पड़ेगा, वैसे ही धीरे-धीरे मनरेगा बंद होने लगेगी।मोदी सरकार अब राज्यों पर जी राम जी का लगभग 50,000 करोड़ का बोझ डालना चाहती है, उन्हें 40 प्रतिशत खर्च उठाने के लिए मजबूर किया जा रहा है.मनरेगा योजना देश के गरीब से गरीब लोगों के लिए रोजगार का सहारा थी, जो कोरोना जैसे मुश्किल हालातों में भी उनके साथ थी। इसलिए ये बिल गरीब मजदूरों के खिलाफ है।100 दिन से 125 दिन की मजदूरी वाली बात सिर्फ एक चालाकी है, वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 70 प्रतिशत गांव में भाजपा की सरकार आने के बाद से अघोषित तौर पर काम नहीं दिया जा रहा है। पिछले 11 सालो में मोदी सरकार बनने के बाद मनरेगा में काम देने का राष्ट्रीय औसत मात्र 38 दिनों का है। मतलब 11 सालो में मोदी सरकार किसी भी साल 100 दिन काम नहीं दे पाई।मनरेगा काम करने का सही अधिकार था, उसे अब एक एडमिनिस्ट्रेटिव मदद में बदला जा रहा है, जो पूरी तरह से केंद्र की मर्जी पर निर्भर है।
भाजपा भगवान राम के नाम पर एक बार फिर झूठ बोल रही है। वी बी जी .राम.जी .में जो राम जी बता रहे उसमें कही भी भगवान राम नही है. वी बी जी .राम.जी . का फूल फार्म है (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन-ग्रामीण) है। प्रेसवार्ता क़े दौरान सिहावा विधायक अम्बिका मरकाम कांग्रेस जिलाध्यक्ष तारिणी चंद्राकर पूर्व विधायक गुरूमुख सिंह होरा लेखराम साहू पूर्व जिलाध्यक्ष शरद लोहाना नींलम चंद्राकर मोहन लालवानी पंकज महावर आंनद पवार गोपाल शर्मा दीपक सोनकर योगेश शर्मा कविता बाबर मदन मोहन खंडेलवाल अरविन्द दोशी विजय प्रकाश जैन आदि उपस्थित रहे.

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

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