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भाजपा द्वारा महिला आरक्षण को लेकर लगातार झूठा भ्रम फैलाया जा रहा कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन नहीं किया-कांग्रेस

महिला आरक्षण पर केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर राजीव भवन मे कांग्रेस द्वारा ली गई प्रेस वार्ता,मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे भानुप्रतापपुर विधायक सावित्री मंडावी

महिला आरक्षण पर केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर आज राजीव भवन मे कांग्रेस द्वारा प्रेस वार्ता ली गई. जिसमे मुख्य वक्ता के रूप में भानुप्रतापपुर विधायक श्रीमति सावित्री मंडावी एवं जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष तारिणी चंद्राकर विधायक ओंकार साहू पूर्व विधायक लेख राम साहू पूर्व जिलाध्यक्ष शरद लोहाना मोहन लालवानी कविता बाबर अरविन्द दोशी आकाश गोलछा दीपक सोनकर धामेश्वरी साहू विक्रांत पवार सहित अन्य कांग्रेसी मौजूद रहे.
इस दौरान कांग्रेसियों ने कहा कि प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक झूठ बोल रहे है। भाजपा द्वारा महिला आरक्षण को लेकर लगातार झूठा भ्रम फैलाया जा रहा कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन नहीं किया, इसलिए संसद में बिल पास नहीं हो सका।महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023) 128वां संविधान संशोधन सितंबर 2023 में संसद के दोनों सदनों में पारित हो चुका है तथा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस पर हस्ताक्षर कर चुकी है तथा यह कानून भी बन चुकी है।भाजपा 2023 के आरक्षण बिल को क्यों लागू नहीं कर रही है? इस बिल के आधार पर तुरंत आरक्षण प्रभावी हो सकता है।भाजपा ने 16 अप्रैल 2026 को जो विधेयक संसद में प्रस्तुत किया 131 वां संविधान संशोधन अधिनियम इसमें महिला आरक्षण के संदर्भ में नहीं भाजपा महिला आरक्षण को मुखौटा बनाकर परिसीमन संशोधन बिल तथा केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल को पास करवाना चाहती थी।संसद में जो विधेयक गिरा उसमें इस विधेयक में लोकसभा परिसीमन की सीटें 850 करने का प्रस्ताव था राज्यों में 815 सीटें तथा केंद्र शासित प्रदेशों में 35 सीटें।परिसीमन विधेयक- जिसमें परिसीमन के लिये 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात की गयी थी। विधेयक में पांडुचेरी, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर के कानूनों में संशोधन की बात की गयी थी ताकि परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक लागू किया जा सके।जब 2026-27 की जनगणना शुरू है तथा सरकार जाति जनगणना की भी बात कर चुकी है तो जनगणना के बाद आये नये आंकड़ों के आधार पर परिसीमन क्यों नहीं कराया जा रहा? महिला आरक्षण बिल को यदि तुरंत लागू करना है तो परिसीमन का इंतजार किए बिना वर्तमान सदस्य संख्या में ही 33 प्रतिशत का आरक्षण क्यों नहीं देना चाहती सरकार? कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल इसके लिए तैयार है।सरकार 2023 के महिला आरक्षण बिल नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन कर महिला आरक्षण को तुरंत लागू कर सकती थी उसने ऐसा क्यों नहीं किया? जबकि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 जो कानून बन चुका है 2034 से मूर्त रूप लेगा संशोधन से तुरंत लागू हो जाता,भाजपा की मंशा महिला आरक्षण की नहीं अपने मनमुताबिक सीटों के परिसीमन की थी जो विपक्षी दलों की एकजुटता से पूरा नहीं हो चुका।

*कांग्रेस शुरु से महिला आरक्षण की पक्षधर*

कांग्रेसियों ने आगे कहा कि पंचायतों एवं स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण मिल रहा तो यह भी कांग्रेस की नीतियों से संभव हो पाया। सबसे पहले राजीव गांधी ने 1989 के मई महीने में पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं के एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक पेश किया। वह विधेयक लोकसभा में पारित हो गया था लेकिन सितंबर 1989 में राज्यसभा में पास नहीं हो सका। अप्रैल 1993 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं के एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक को फिर से पेश किया। दोनों विधेयक पारित हुए और कानून बन गए। महिलाओं के लिए संसद और राज्यों की विधानसभाओं में एक तिहाई आरक्षण के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह संविधान संशोधन विधेयक लाए। विधेयक 9 मात्र 2010 को राज्यसभा में पारित हुआ। कांग्रेस की सरकारों के प्रयास से ही आज देशभर में पंचायतों और नगर पालिकाओं में लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं। सीटों के परिसीमन का भाजपा का षड़यंत्र विफल हो गया है, अतः वह महिला आरक्षण नाम पर पूरे देश में भ्रम फैला रही है।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

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