जो एक बार धर्म के मर्म को समझ जाएगा उसे कही और सुख मिल ही नहीं सकता-परम पूज्य वीरभद्र मुनि
प्रवचन के माध्यम से कहा कि मंदिर जाना, दान देना, तपस्या करना ये सब केवल धार्मिक क्रिया है, हम धर्म के वास्तविक स्वरूप को समझ ही नहीं पाए है
पद विहार के तहत पार्श्वनाथ जिनालय मे मंगल प्रवेश के बाद हुआ प्रवचन
व्याख्यान वाचस्पति परम पूज्य जयानंद मुनि जी महाराज साहेब के सुशिष्य रत्न गणाधीश पन्यास प्रवर श्री विनय कुशल मुनि गणि जी, परम पूज्य नन्दीसेन मुनि जी महाराज साहेब, परम पूज्य पन्यास प्रवर श्री वीरभद्र मुनि गणि जी(विराग मुनि जी), परम पूज्य भव्य मुनि जी महाराज साहेब, परम पूज्य सोमभद्र मुनि जी महाराज साहेब, परम पूज्य सुहस्ती भद्र मुनि जी महाराज साहेब, शतावधानी बालमुनि हंसभद्र जी महाराज साहेब का आज धमतरी की धन्यधरा में आगमन हुआ।
आज परम पूज्य वीरभद्र मुनि गणि जी महाराज साहेब का 134 उपवास है।
परम पूज्य वीरभद्र मुनि गणि जी ने प्रवचन के माध्यम से फरमाया कि जीवन में सुख पाने के लिए परमात्मा ने जो धर्म का मार्ग बताया और उस मार्ग को जिसने समझ लिए वो सुखी हो गया। और जो नहीं समझ पाया वो सुखी नहीं हो पाया। मंदिर जाना, दान देना, तपस्या करना ये सब केवल धार्मिक क्रिया है। सच तो ये है कि हम धर्म के वास्तविक स्वरूप को नहीं समझ पाए। हम व्यापार में हर साल आर्थिक स्थिति की जानकारी के लिए बैलेंस शीट बनाते है। लेकिन आजतक आत्मा के विकास के लिए बैलेंस शीट नहीं बना पाए। आज हमें वास्तव में धर्म क्या है ये समझने का प्रयास करना है। जो एक बार धर्म के मर्म को समझ जाएगा उसे कही और सुख मिल ही नहीं सकता। किन्तु आज हमें धर्म के स्थान पर धन में सुख और धन से सुख प्राप्त करने का प्रयास करते है।
आज हम दुख को दबाना ही सुख मानते है, जबकि वास्तव में जो लगातार बढ़ते जाए वो सुख है। आज हमें ये धर्म सहज ही प्राप्त हो गया है इसलिए हम इसका महत्व नहीं समझ पा रहे है। धर्म किसी भी क्रिया से अलग है।
ज्ञानी भगवंत कहते है ज्ञान क्रियाभ्यम मोक्षः। अर्थात ज्ञान और क्रिया मिलकर ही मोक्ष दिला सकती है। लेकिन हम केवल क्रिया को ही धर्म मान लेते है यही हमारी ना समझी है। चेहरे में प्रसन्नता और मन में जिज्ञासा ही हमे वास्तविक धर्म तक पहुंचा सकती है। जिस दिन हम पूरी जिज्ञासा के साथ धर्म के मूल तत्व को समझ पाएंगे धर्म को प्राप्त करने का पुरुषार्थ कर पाएंगे उस दिन जीवन में सुख बढ़ते जाएगा।महाराज साहेब के भव्य नगर प्रवेश के अवसर पर भंवरलाल छाजेड़, जीवनलाल लोढ़ा, लूणकरण गोलछा, पारसमल गोलछा, प्रकाश गुच्छा, अशोक राखेचा, प्रकाश पारख, विनय पारख, महेश सेठिया, अनोप राखेचा, रमन लोढ़ा, धरमचंद पारख, शिशिर सेठिया, ज्ञानंचंद बैद, अभय बरडिया, संजय छाजेड़, कुशल चोपड़ा, आकाश गोलछा, अंकित बरडिया, मयूर पारख, गोल्डी कोचर, विजय दुग्ध, आकाश छाजेड़, प्रतीक बैद, हितेश चोपड़ा, आशीष बंगानी, कमलेश भंसाली सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।