मनुष्य जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल अवश्य प्राप्त होता है-संत लोकेश

आचार्य सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज के 140 वें जन्मोत्सव के चालीहा महोत्सव के सातवें दिन के चालीसा पाठ, सत्संग एवं भंडारे का आयोजन
आचार्य सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज के 140 वें जन्मोत्सव के चालीहा महोत्सव के सातवें दिन के चालीसा पाठ एवं सत्संग एवं भंडारे का आयोजन श्री प्रेम प्रकाश आश्रम पर रात्री 8.30 बजे से 10 बजे तक हुआ आज का आयोजन माता श्रीमती मीरादेवी नारायणदास वाशानी के पूरे परिवार ने अमरापुरवासी नारायणदास वाशानी जिन्होंने आश्रम के भवन निर्माण की देख रेख की थी आपके प्रथम पुण्य तिथि के उपलक्ष्य में कराया जिसमें पुरुषोत्तम प्रकाश प्रहलाद तीनों सुपुत्रों एवं दामादजी किशोर कुमार गेमनानी बिलासपुर एवं उनके सभी रिश्तेदार शामिल हुए एवं उपस्थित सभी भक्तों को भोजन खिलाकर पुण्य प्राप्त किया. सत्संग में संत लोकेश जी ने कहा कि तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में ही है, उसके फल में कभी नहीं,इसलिए, तुम कभी भी कर्मों के फल की इच्छा से कार्य मत करो और न ही किसी काम (कर्तव्य) को करने में आपकी कोई आसक्ति हो.ईश्वर ने कर्म-प्रधान बनाया है। इसका नियम बिल्कुल स्पष्ट है कि जो मनुष्य जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल अवश्य प्राप्त होता है अर्थात अच्छे कर्म का अच्छा फल और बुरे कर्म का बुरा फल. यह संसार कर्म के सिद्धांत से बना है कर्म दो प्रकार के हैं निष्काम एवं सकाम, सदैव निष्काम कर्म करते रहना चाहिए इसका फल दीर्घकालिक होता है जो साथ चलेगा लेकिन जो लोग निष्काम कर्म नहीं कर सकें तो उनको सकाम शुभ कर्म करना भी हितकर है जिसका फल भले ही अल्प कालिक है तो भी अच्छा है लेकिन पापकर्म तो भूल कर भी न करे क्योंकि ऐसे कर्म जीवन में दुःख देंगे सुख चाहते हो तो लोगों की भलाई से भरे परोपकारी कर्म करें.
