मालाबार पाइड हॉर्नबिल, भारतीय विशाल गिलहरी, उडऩ गिलहरी, भारतीय पिद्दा, बाघिन आदि जैसे पशु-पक्षियों की मौजूदगी यूएसटीआर के पारिस्थितिक पुनरुत्थान का है संकेत
पिछले चार वर्षों से जारी वन संरक्षण, अवैध शिकार विरोधी अभियान, आवास पुनस्र्थापन तथा प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के आ रहे सकारात्मक परिणाम
ग्रेहेडेड, फिश ईगल, कठफोड़वा, बाबैटे मिनिव्रेट सहित स्थानीय पक्षियों की है मौजूदगी

धमतरी। उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व धमतरी-गरियाबंद के वन्यजीव संरक्षण की दिशा में लगातार बेहतर सफलता दर्ज कर रही है। क्षेत्र में कई दुर्लभ पशु पक्षी नजर आ रहे है। जिससे भविष्य में यूएसटीआर को प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र बनेगा।
रिजर्व में हाल ही में किए गए सर्वेक्षण एवं मॉनिटरिंग के दौरान मालाबार पाइड हॉर्नबिल द्वारा फलाहारी चमगादड़ का शिकार करते हुए दुर्लभ व्यवहार दर्ज किया गया है। साथ ही भारतीय पिट्टा के किशोर पक्षी (जुवेनाइल) का फोटोग्राफिक साक्ष्य भी प्राप्त हुआ है, जो इस क्षेत्र में उसके सफल प्रजनन की पुष्टि करता है। मालाबार पाइड हॉर्नबिल को सामान्यत: फलों पर निर्भर पक्षी माना जाता है, लेकिन उसे फलाहारी चमगादड़ का शिकार करते देखना अत्यंत दुर्लभ और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण घटना है। यह पक्षी के व्यवहारिक अनुकूलन तथा समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत माना जा रहा है। इसी दौरान भारतीय पिट्टा के किशोर पक्षी का भी फोटोग्राफ प्राप्त हुआ, जिससे स्पष्ट होता है कि यह रंग-बिरंगी और आकर्षक प्रजाति अब रिजर्व क्षेत्र में प्रजनन कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय पिट्टा पारंपरिक रूप से हिमालय की तराई एवं आसपास के क्षेत्रों में प्रजनन करती रही है। ऐसे में उदंती-सीतानदी में इसके प्रजनन के साक्ष्य मिलना प्रजाति के प्रजनन क्षेत्र के विस्तार और पर्यावरणीय अनुकूल परिस्थितियों की ओर संकेत करता है। वन विभाग ने बताया कि पिछले चार वर्षों से चल रहे वन संरक्षण, अवैध शिकार विरोधी अभियान, आवास पुनस्र्थापन तथा प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। रिजर्व में कई पक्षी प्रजातियों का प्रजनन दर्ज किया गया है और वन्यजीवों की वापसी भी देखने को मिल रही है।
रायपुर से लगभग 130 किमी की दूर पर स्थित है यूएसटीआर, पक्षी प्रेमियों और प्रकृति पर्यटकों के लिए तेजी से बन रहा आकर्षण का केन्द्र
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, जो रायपुर से लगभग 130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, पक्षी प्रेमियों और प्रकृति पर्यटकों के लिए तेजी से आकर्षण का केंद्र बन रहा है। यहां भारतीय विशाल गिलहरी एवं दुर्लभ भारतीय विशाल उडऩ गिलहरी जैसी प्रजातियां नियमित रूप से देखी जाती हैं। इसके अलावा ब्राउन फिश आउल, ग्रे-हेडेड फिश ईगल, कठफोड़वा, बार्बेट, मिनिवेट सहित अनेक स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी इस क्षेत्र की जैव विविधता को समृद्ध बनाती है।
टायगर रिजर्व कोर क्षेत्रो में रात्रिकालीन यातायात पर प्रतिबंध से पुनर्सयोजन वन्य जीवों के पुनस्थापन के लिए लाभदायक
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा देशभर के टाइगर रिजर्वों के कोर क्षेत्रों में रात्रिकालीन यातायात पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण द्वारा दिसम्बर 2025 में इस निर्णय को लागू करने के पश्चात उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में इसके अत्यंत सकारात्मक पारिस्थितिक परिणाम दिखाई देने लगे हैं। रात्रिकालीन यातायात बंद होने के पश्चात इन दुर्लभ वृक्षवासी प्रजातियों का विस्तार अब उदंती एवं सीतानदी कोर क्षेत्रों से आगे बढ़कर रिसगांव (कोर), इंदागांव (बफर), आरसीकन्हार (बफर) तथा कुल्हाड़ीघाट (बफर) क्षेत्रों तक दर्ज किया जा रहा है। यह विस्तार इस बात का संकेत है कि टाइगर रिजर्व की पारिस्थितिक गुणवत्ता एवं वृक्षीय संपर्कता पुनर्जीवित हो रही है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के दो कोर क्षेत्रों उदंती कोर एवं सीतानदी कोर से क्रमश: राष्ट्रीय राजमार्ग 130 सी और 130 सीडी होकर गुजरते हैं। उक्त निर्णय से मानव व वन्य पशु पक्षियों के भिड़ंत की घटनाएं कोर एरिये में काफी कम हुई है। जिससे अनुकुल वातावरण निर्मित हो रहा है।
