उद्यानिकी विभाग की योजना से बदली कमार कृषक की तकदीर, खीरे की खेती बना आय का सशक्त माध्यम
कमार कृषक ने अपनाई वैज्ञानिक खेती, खीरे की फसल से बढ़ी आमदनी

धमतरी। जिला धमतरी के विकासखंड नगरी अंतर्गत ग्राम सेलबहरा के विशेष पिछड़ी जनजाति कमार समुदाय से जुड़े प्रगतिशील कृषक खीमांशु गजेसिंग ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि किसानों को समय पर तकनीकी मार्गदर्शन और शासकीय योजनाओं का सहयोग मिले तो सीमित संसाधनों में भी खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। श्री गजेसिंग के पास लगभग 10 एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें उन्होंने इस वर्ष 4 एकड़ क्षेत्र में खीरे की व्यावसायिक खेती की है। उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों द्वारा उन्हें उन्नत खेती की तकनीक, गुणवत्तायुक्त बीजों के चयन, संतुलित पोषण प्रबंधन, सिंचाई, पौध संरक्षण तथा फसल की नियमित निगरानी संबंधी आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया गया। विभागीय योजनाओं का लाभ मिलने से उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से खेती अपनाई, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में उल्लेखनीय सुधार हुआ।पहले पारंपरिक खेती से सीमित आय प्राप्त होने के कारण कृषि की लागत निकालना भी चुनौतीपूर्ण रहता था। लेकिन उद्यानिकी विभाग के निरंतर मार्गदर्शन और आधुनिक तकनीकों को अपनाने के बाद अब खीरे की खेती उनके लिए बेहतर आय का सशक्त माध्यम बन गई है। स्थानीय बाजारों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी उनकी उपज की अच्छी मांग है, जिससे उन्हें उचित मूल्य प्राप्त हो रहा है और परिवार की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव आया है। श्री गजेसिंग का कहना है कि विभागीय अधिकारियों के नियमित संपर्क, समय-समय पर दिए गए तकनीकी सुझाव और शासकीय योजनाओं के सहयोग से उन्हें खेती को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर मिला। अब वे भविष्य में अन्य उद्यानिकी फसलों का भी विस्तार करने तथा आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित हैं। आज श्री खीमांशु गजेसिंग की सफलता ग्राम सेलबहरा सहित आसपास के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी है।