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देश की एकता अखंडता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के पुरोधा थे डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी पं. राजेश शर्मा


धमतरी। भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रवादी विचारक, महान शिक्षाविद् एवं भारत की एकता और अखंडता के प्रबल समर्थक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर भाजपा प्रदेश कार्यसमिति स्थाई आमंत्रित सदस्य पं. राजेश शर्मा ने उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि डॉ. मुखर्जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, त्याग, समर्पण और राष्ट्रीय एकता के लिए समर्पित रहा। उनके विचार आज भी करोड़ों देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। पं. राजेश शर्मा ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने स्वतंत्र भारत में राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक चेतना और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोच्च मानते हुए अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। उनका स्पष्ट संदेश एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे भारत की अखंडता के प्रति उनके अटूट संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का मानना था कि देश की एकता और अखंडता से बड़ा कोई उद्देश्य नहीं हो सकता। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पूर्ण एकीकरण के लिए संघर्ष किया और राष्ट्र की एकता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका त्याग भारतीय इतिहास में सदैव स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा। पं. शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों को साकार करने का ऐतिहासिक कार्य किया है। यह निर्णय भारत की एकता और अखंडता को और अधिक सशक्त बनाने वाला सिद्ध हुआ है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी डॉ. मुखर्जी के विचारों, राष्ट्रभक्ति, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और सेवा भावना को अपने जीवन में अपनाए तथा विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए।

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