पशु सखियों ने सीखा आधुनिक पशुपालन का व्यवहारिक ज्ञान:शैक्षणिक भ्रमण बना ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण का माध्यम

धमतरी- बैंक ऑफ बड़ौदा आरसेटी, धमतरी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही पशु सखियों के लिए आयोजित शैक्षणिक भ्रमण उनके लिए सीखने और आत्मविश्वास बढ़ाने का प्रेरक अवसर साबित हुआ। भ्रमण का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत पशु सखियों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक पशुपालन की व्यवहारिक जानकारी प्रदान करना तथा उन्हें तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर ग्रामीण पशुपालकों तक गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ पहुँचाने के लिए तैयार करना था।
भ्रमण के प्रथम चरण में प्रतिभागियों ने दुग्ध शीत केन्द्र, मुजगहन का अवलोकन किया। यहाँ उन्हें दूध संग्रहण, गुणवत्ता परीक्षण, वसा एवं एसएनएफ जाँच तथा शीतलीकरण की संपूर्ण प्रक्रिया प्रत्यक्ष रूप से दिखाई गई। विशेषज्ञों ने बताया कि दूध को निर्धारित तापमान पर सुरक्षित रखने से उसकी गुणवत्ता बनी रहती है और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त होता है। इस अनुभव से पशु सखियों को दुग्ध उत्पादन से लेकर विपणन तक की वैज्ञानिक प्रक्रिया को समझने का अवसर मिला।
इसके बाद पशु सखियों ने ग्राम पोटियाडीह एवं बोड़रा (स.) के गौधामों का भ्रमण किया। यहाँ नियमित कृत्रिम गर्भाधान रूट के माध्यम से किए जा रहे नस्ल सुधार कार्यों का निरीक्षण कराया गया। चरवाहों और पशुपालकों के सहयोग से उन्हें गौठानों में पहुँचकर कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं के संचालन, उन्नत नस्लों की पहचान, दुग्ध क्षमता बढ़ाने की तकनीक तथा वैज्ञानिक पशुपालन से होने वाले आर्थिक लाभों की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रतिभागियों ने प्रत्यक्ष रूप से देखा कि नियमित तकनीकी सेवाओं से पशुधन की उत्पादकता में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
भ्रमण का तीसरा पड़ाव गोविंदी देवी गौशाला रहा, जहाँ हरे चारे के उत्पादन, नेपियर एवं अन्य पोषक चारा फसलों की उपयोगिता, यूरिया उपचारित पैरा के माध्यम से सूखे चारे की पोषण गुणवत्ता बढ़ाने की विधि तथा संतुलित पशु आहार तैयार करने की कम लागत वाली तकनीकों का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही स्वच्छता, टीकाकरण, खुरपका-मुंहपका नियंत्रण तथा पशुओं के वैज्ञानिक प्रबंधन पर भी विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
इस शैक्षणिक भ्रमण का नेतृत्व डॉ. टी. आर. वर्मा ने किया। इस अवसर पर डॉ. प्रमोद ठाकुर, राकेश सिन्हा एवं एन. आर. टंडन उपस्थित रहे और प्रतिभागियों को विभिन्न तकनीकी विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया। विशेषज्ञों ने पशु सखियों को केवल प्रशिक्षार्थी नहीं, बल्कि ग्रामीण पशुपालन व्यवस्था की भविष्य की तकनीकी सहयोगी बताते हुए उन्हें गांव-गांव में वैज्ञानिक पशुपालन के प्रसार हेतु प्रेरित किया।
प्रशिक्षण प्राप्त पशु सखियों ने बताया कि इस भ्रमण से उन्हें पशुपालन की अनेक व्यवहारिक तकनीकों को नजदीक से समझने का अवसर मिला, जिससे वे अपने गांवों में पशुपालकों को अधिक प्रभावी सलाह दे सकेंगी। अब वे दुग्ध गुणवत्ता, संतुलित आहार, नस्ल सुधार, चारा प्रबंधन तथा पशु स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं के बारे में ग्रामीण परिवारों को जागरूक करने के लिए और अधिक आत्मविश्वास के साथ कार्य करेंगी।
यह पहल न केवल पशु सखियों के कौशल विकास का उदाहरण है, बल्कि महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण आजीविका संवर्धन और वैज्ञानिक पशुपालन को बढ़ावा देने की दिशा में धमतरी जिले का एक प्रेरणादायी प्रयास भी है। प्रशिक्षण और व्यवहारिक अनुभव का यह समन्वय भविष्य में दुग्ध उत्पादन वृद्धि, पशुधन उत्पादकता सुधार और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
