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लगातार बेहतर प्रयासों का परिणाम : यूएसटीआर में 8 महीने से गूंज रही बाघिन की दहाड़़

टाइगर विहीन हो चुकी उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में फिर से लगातार बाघिन कर रही विचरण, रिजर्व क्षेत्र के बेहतर परिस्थिति का तंत्र का सबूत

हर वर्ष 29 जुलाई को मनाया जाता है अन्तर्राष्ट्रीय टाइगर दिवस पर धमतरी वनमंडल, करीब 8 वर्षों बाद हुई बाघ की वापसी, बेहतर संरक्षण और अनुकूल पर्यावास का परिणाम
छग के 5 टाइगर रिजर्व में है कुल 35 टाइगर सबसे ज्यादा अचानक मार टाइगर रिजर्व मे है 18 टाइगर

धमतरी। हर वर्ष 29 जुलाई को विश्वभर में अंतर्राष्ट्रीय टाइगर दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य बाघों के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित बनाए रखने का संदेश देना है। इस अवसर पर धमतरी जिले के लिए सबसे बड़ी और गौरवपूर्ण बात यह है कि धमतरी-गरियाबंद जिले में फैले उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में एक बार फिर बाघ की मौजूदगी दर्ज की जा रही है। करीब 8 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में बाघ की वापसी हुई थी और वर्तमान में भी उसकी मौजूदगी के लगातार प्रमाण मिल रहे हैं। पिछले 7 से 8 महीनों के दौरान वन विभाग को अलग-अलग क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप, पदचिह्न और अन्य संकेतों के माध्यम से बाघ की सक्रियता के साक्ष्य लगातार प्राप्त हुए हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि रिजर्व का जंगल अब फिर से बाघों के लिए अनुकूल और सुरक्षित आवास बनता जा रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी जंगल में बाघ की मौजूदगी वहां के स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र (इकोसिस्टम) का सबसे बड़ा संकेत होती है। बाघ खाद्य श्रृंखला के शीर्ष शिकारी होते हैं और उनकी उपस्थिति जंगल में शाकाहारी वन्यजीवों की पर्याप्त संख्या, घने वन क्षेत्र, जल स्रोतों की उपलब्धता तथा सुरक्षित वातावरण को दर्शाती है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में बाघ की वापसी वन विभाग द्वारा किए जा रहे संरक्षण कार्यों, वन सुरक्षा, अवैध शिकार पर नियंत्रण, वन्यजीव निगरानी और स्थानीय समुदायों के सहयोग का सकारात्मक परिणाम माना जा रहा है। लगातार निगरानी और संरक्षण प्रयासों के कारण अब यह रिजर्व फिर से बाघों के लिए अनुकूल आवास के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। अंतर्राष्ट्रीय टाइगर दिवस के अवसर पर यह उपलब्धि केवल धमतरी और गरियाबंद जिले ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। बाघ की मौजूदगी से वन्यजीव पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलने के साथ-साथ जैव विविधता संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
एक नये बाघ के मिले पगचिन्ह, मौजूद बाघिन की पहली प्रेग्नेंसी रिपोर्ट पॉजीटिव
बता दे कि यूएसटीआर से एक और उत्साहजनक खबर आ रही है एक नये बाघ के पगचिन्ह मिले है। साथ ही मौजूद बाघिन के मल जांच में पहली प्रेग्नेंसी रिपोर्ट पॉजीटिव मिली है। रिपोर्ट की शत-प्रतिशत पुष्टि हेतु सेंपल जबलपुर भेजे गए है। वहीं यूएसटीआर में मध्यप्रदेश से दो और टाइगर लाने की तैयारी की जा रही है।
धमतरी वन मंडल में भी बाघ के मौजूदगी के मिले प्रमाण


यूएसटीआर के साथ ही धमतरी वन मंडल में भी टाइगर के मौजूदगी के निशान मिलते रहे है। जिले के केरेगांव रेंज में बाघ के फुटप्रिंट अक्टूबर 2025 में मिले थे। जिसके बाद धमतरी वन मंडल द्वारा आसपास के कई गांवो में मुनादी कराई गई थी। साथ ही टीम को अलर्ट पर रखा गया था कई दिनों तक बाघ के क्षेत्र में विचरण के प्रमाण मिलते रहे है।
देश में 3682, छत्तीसगढ़ में 35 बाघ
भारत में अधिकारिक तौर पर देश में कुल 55 टाइगर रिजर्व है, जिनमें 3682 बाघ अंतिम विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार होना बताया गया है वहीं नये अनुमानों के अनुसार बाघो की संख्या देश में बढ़ रही है। जो कि 3900 से 4000 तक हो सकती है। वहीं छत्तीसगढ़ की बात करें तो यहां कुल 5 टाइगर रिजर्व है। जिनमें 35 टाइगर है सबसे ज्यादा अचानक मार टाइगर रिजर्व में 18 गुरुघासीदास तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व में 7, इद्रावंती टाइगर रिजर्व में 6, भोरमदेव वन्यजीव अभ्यारण्य में 3 व उंदती सीतानदी टाइगर रिजर्व में 1 बाघ है।
टाइगर संरक्षण हेतु किये जाते है प्रयास – डीएफओ श्रीकृष्ण जाधव
चर्चा के दौरान धमतरी डीएफओ श्रीकृष्ण जाधव ने बताया कि धमतरी वन मंडल में पूर्व में टाइगर के मौजूदगी के प्रमाण मिलते रहे है। ऐसे समय में विभाग पूरी तरह अलर्ट रहता है। लोगों को भी समय-समय पर टाइगर के संक्षरण व उनसे बचने के प्रति जागरुक किया जाता है। यूएसटीआर के साथ भी समन्वय बनाकर टाइगर संरक्षण के प्रयास किये जाते है। पूर्व में लगभग 1 महीने तक टाइगर धमतरी वन मंडल में विचरण करता रहा ऐसे में कहा जा सकता है स्थानीय जंगल टाइगर रहवास के अनुकूल है। और यहां पर्याप्त शिकार है। टाइगर संरक्षण हेतु एक कम्बाइड टाइगर ट्रेकिंग टीम भी है। जिसमें धमतरी कांकेर, केशकाल, कोण्डागांव, यूएसटीआर वनमंडल सूचना आदान प्रदान कर टाइगर संक्षरण के प्रयास किये जाते है।
ट्रैप कैमरे, एआई सिस्टम, शिकारियों पर कार्रवाई, पेट्रोलिंग, जागरुकता आदि हो रहे बाघ संरक्षण के प्रयास – उपनिदेशक यूएसटीआर वरुण जैन
चर्चा के दौरान उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया कि 4 वर्षीय बाघिन पिछले 7-8 महीने से क्षेत्र में मौजूद है। यूएसटीआर में बाघ संरक्षण के अनेक उपाय किये जाते रहे है। जिनमें ट्रैप कैमरे, एआई सिस्टम, शिकारियों पर सख्ती लगातार पेट्रोलिंग, मजबूत सूचना तंत्र जागरुकता आदि शामिल है। इसके अतिरिक्त पिछले कुछ सालों में 900 हेक्टेयर से अधिक अवैध कब्जे हटाये गये है। इन प्रयासों से वन्य जीवों के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित व अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है।
बाघो के लिए है अनुकूल वातवरण व पर्याप्त शिकार
यूएसटीआर के उपनिदेश वरुण जैन ने बताया कि उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में बाघो के लिए अनुकूल वातावरण देने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। क्षेत्र में बाघो के लिए पर्याप्त शिकार है। टाइगर एरिया में जंगली सूवर, सांभर, चीतल, कोटरी आदि कई शिकार पर्याप्त संख्या में है। बेहतर वातावरण और पर्याप्त शिकार होने के कारण ही बाघिन भीषण गर्मी में भी रिजर्व क्षेत्र में रही और लगभग 8 महीने से है।
टाइगर रिजर्व प्रोजेक्ट से विकास से कोसो दूर रहे स्थानीय ग्रामीण
उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व प्रोजेक्ट घोषित होने के बाद कई कड़े नियम क्षेत्र में लागू हो गये जिससे स्थानीय गांवो में विकास का विस्तार नहीं हो पाया। अब विकास की मांग जोर पकड़ रही है। कुछ समय पूर्व 50 से अधिक गांवो के हजारों ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं पक्की सड़क, पुल, पुलिया, बिजली, पानी मोबाईल टावर, अस्पताल आदि की मांग मजबूती से रखी गई कलेक्ट्रेट का भी घेराव किया गया था टाइगर रिजर्व क्षेत्र में कड़े नियमो के कारण इन गांवो में विकास का विस्तार अब तक नहीं हो पाया है।

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