भारतीय संस्कृति विरासत के रूप में आध्यात्मिकता को मानव कल्याण के लिए सहज रूप में प्रदान किया है: विज्ञान देव जी महाराज
कश्मीर से कन्याकुमारी राष्ट्र व्यापी स्वर्वेद संकल्प यात्रा लगभग 40000 हजार कि मी की यात्रा कर धमतरी पहुंची

धमतरी। जहां प्रेम की पूर्णता है वहीं परमात्मा का वास है। जहां सत्य, श्रद्धा समर्पण, सेवा भाव है वहीं आत्मा का कल्याण और परमात्मा का प्रकाश है। उक्त उद्गार स्वर्वेद कथामृत के प्रवर्तक सुपूज्य संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने राष्ट्रव्यापी स्वर्वेद सन्देश यात्रा के क्रम में लगभग 40000 हजार कि मी की यात्रा कर धमतरी स्थित हरदिया साहू समाज भवन मे आयोजित जय स्वर्वेद कथा एवं ध्यान साधना सत्र में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं के मध्य व्यक्त किये। यह यात्रा कश्मीर के लाल चौक से तिरंगा और विहंगम योग का पावन ध्वजा ‘अÓ अंकित श्वेत ध्वजा फहराकर शुरुआत किया गया। 26 नवंबर की संध्या में संविधान दिवस के उपलक्ष्य मे देश में समर्पित शहीदों के लिए हजारों-हजारों की संख्या में दीप प्रज्ज्वलित किया जाएगा। उपरोक्त कार्यक्रम में धमतरी नगरनिगम के महापौर रामू रोहरा, पूर्व विधायक रंजना साहू, डीपेंद्र साहू,नरेंद्र साहू,श्याम अग्रवाल,अशोक साहू पिछड़ा वर्ग मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष,पार्षद गण पिंटू यादव,विभा चंद्राकर,सुशीला तिवारी,जनपद सदस्य कीर्तन मिनपाल,अग्रवाल साहू, कांकेर जिला पंचायत अध्यक्ष कांकेर श्रीमती किरण नरेटी, चंद्रभागा वर्मा, सुशीला तिवारी, राजेंद्र शर्मा, विहंगम योग के प्रदेश निदेशक बब्बन सिंह, कोटेश्वर चापड़ी, दयाराम साहू, उमेश साहू,सुश्री श्यामा उसेंडी,सत्येंद्र कुमार स्वर्वेदी, महेश चापड़ी, एच एल चक्रधारी, उमेश पांडेय, पी एल सपहा, जाधव राम साहू, बेदराम साहू, टिकेश्वर साहू, डॉ बी एल साहू, संजय साहू, कमल गंधर्व, राम गोपाल चक्रधारी, परमेश्वर साहू, नारायण सिंह साहू, बलीराम साहू, दीनदयाल साहू, धनंजय साहू, दुर्योधन साहू, मिथिलेश साहू, डाकेश्वर यादव, सोनू राम साहू, बिष्णुराम साहू, महेन्द्र साहू, सालिक राम साहू, सियाराम कोर्राम, रामाधार, कुंजुलाल साहू, पुरूषोत्तम वर्मा, चंदूलाल साहू, महेश्वरी चक्रधारी, मीना साहू, लक्ष्मी साहू, शिवरानी यदु, सोनम साहू, रूपा साहू, चंपा साहू, महालक्ष्मी बघेल, कल्याणी बघेल, चंद्रिका साहू, बिसाहिन साहू, सुनिती साहू, रमला साहू, गोमती साहू, लक्ष्मी साहू, भुनेश्वरी साहू के साथ अत्याधिक संख्या में श्रद्धालुगण जिज्ञासुवृंद आध्यात्म पिपासु उपस्थित होकर कथामृत का रसा स्वादन किए। सभी के महाप्रसादी की व्यवस्था थी।
