झमाझम बारिश से शहर के तालाब हुए लबालब, भूजल स्तर बढऩे की उम्मीद
अधिकांश तालाबों में बेहतर जलभराव, लेकिन नालियों का गंदा पानी पहुंचने से जल गुणवत्ता पर मंडरा रहा खतरा

धमतरी। लगातार हो रही अच्छी बारिश ने शहर के अधिकांश तालाबों को नई जिंदगी दे दी है। जो तालाब कुछ सप्ताह पहले तक सूखे पड़े थे या जिनमें बहुत कम पानी बचा था, वे अब पूरी तरह लबालब भर चुके हैं। लगभग सभी प्रमुख तालाबों में जलभराव की स्थिति बेहतर होने से शहर के भूजल स्तर (अंडरग्राउंड वाटर लेवल) में सुधार की उम्मीद बढ़ गई है। इसे पर्यावरण और जल संरक्षण की दृष्टि से सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार तालाबों में पर्याप्त जलभराव होने से आसपास के क्षेत्रों में भूजल का पुनर्भरण (रिचार्ज) होता है। इसका लाभ आने वाले महीनों में लोगों को मिलेगा, जिससे हैंडपंप, कुएं और बोरवेल में पानी की उपलब्धता बेहतर रहने की संभावना है। साथ ही जल स्रोतों के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के लिए भी यह स्थिति लाभदायक मानी जा रही है। हालांकि इस सुखद तस्वीर के बीच एक गंभीर समस्या भी सामने आ रही है। शहर के कई तालाबों में नालियों का गंदा पानी सीधे पहुंच रहा है, जिससे तालाबों का पानी प्रदूषित हो रहा है। ऐसे तालाबों का पानी घरेलू उपयोग, धार्मिक कार्यों या अन्य सार्वजनिक उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं रह जाता। गंदे पानी के कारण जल गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ-साथ दुर्गंध, जलजनित बीमारियों और जलीय जीवों पर भी प्रतिकूल असर पडऩे की आशंका बनी रहती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर निगम को इस दिशा में गंभीरता से कदम उठाने चाहिए। नालियों के गंदे पानी को तालाबों में जाने से रोकने के लिए वैकल्पिक निकासी व्यवस्था विकसित की जाए, नियमित सफाई कराई जाए तथा तालाबों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। यदि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाते हैं तो शहर के तालाब न केवल जल संरक्षण का मजबूत आधार बनेंगे, बल्कि स्वच्छ और सुरक्षित जल स्रोत के रूप में भी अपनी उपयोगिता बनाए रख सकेंगे। बारिश ने शहर के तालाबों को फिर से जीवनदान दिया है। अब आवश्यकता इस बात की है कि इन जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाकर उनकी स्वच्छता और उपयोगिता लंबे समय तक बनाए रखने के लिए नगर निगम प्रभावी एवं स्थायी कदम उठाए।

