जल संरक्षण को मिलेगा नया आधार जिले के 357 जल स्रोतों पर बनेंगे सैंड फिल्टर
भू-जल संवर्धन एवं जल स्रोत संरक्षण को मिलेगी नई गति

धमतरी – जल संरक्षण और भू-जल संवर्धन को जनभागीदारी से जोड़ते हुए धमतरी जिला प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। वीबी-जी रामजी योजना के अंतर्गत जिले के 357 जल स्रोतों पर सैंड फिल्टर निर्माण कार्यों के लिए 185.64 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। यह पहल वर्षा जल के वैज्ञानिक प्रबंधन, जल स्रोतों की गुणवत्ता बनाए रखने तथा भू-जल पुनर्भरण को सुदृढ़ करने की दिशा में एक प्रभावी कदम मानी जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार धमतरी विकासखंड में 78, कुरूद विकासखंड में 124, मगरलोड विकासखंड में 48 तथा नगरी विकासखंड में 107 सैंड फिल्टर निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इन सभी कार्यों का क्रियान्वयन संबंधित ग्राम पंचायतों के माध्यम से निर्धारित समय-सीमा में किया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों को शीघ्र लाभ मिल सके।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत ने बताया कि सैंड फिल्टर जल स्रोतों के संरक्षण की एक वैज्ञानिक एवं प्रभावी तकनीक है। तालाब, कुएं, जलाशय तथा अन्य सामुदायिक जल स्रोतों के समीप सैंड फिल्टर के निर्माण से वर्षा जल के साथ आने वाली मिट्टी, गाद, प्लास्टिक, कचरा तथा अन्य अशुद्धियां प्राकृतिक रूप से छन जाती हैं। इससे जल स्रोतों में गाद का जमाव कम होता है, जल की गुणवत्ता बनी रहती है तथा भू-जल पुनर्भरण की प्रक्रिया को भी मजबूती मिलती है।
उन्होंने बताया कि इस योजना का उद्देश्य केवल जल स्रोतों का संरक्षण करना ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा जल के बेहतर प्रबंधन को सुनिश्चित करते हुए जल उपलब्धता को दीर्घकालिक आधार प्रदान करना भी है। प्रत्येक वर्ष मानसून के दौरान बहकर आने वाला मलबा एवं गंदगी तालाबों और अन्य जल स्रोतों को प्रदूषित कर उनकी उपयोगिता को प्रभावित करती है। सैंड फिल्टर प्रणाली इस समस्या का स्थायी एवं प्रभावी समाधान उपलब्ध कराएगी, जिससे जल स्रोत अधिक स्वच्छ, सुरक्षित और उपयोगी बने रहेंगे।
वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा और बढ़ते जल दोहन के कारण भू-जल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। ऐसे परिदृश्य में सैंड फिल्टर वर्षा जल को प्राकृतिक रूप से भूमि में समाहित होने में सहायता करेंगे, जिससे भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलेगा तथा भविष्य में संभावित पेयजल संकट की स्थिति को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। स्वच्छ एवं संरक्षित जल स्रोत पशु-पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे। साथ ही जल स्रोतों की क्षमता और गुणवत्ता में सुधार होने से ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि, मत्स्य पालन तथा अन्य आजीविका आधारित गतिविधियों को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा।
जिला प्रशासन ने सभी ग्राम पंचायतों से सैंड फिल्टर निर्माण के साथ-साथ उनके नियमित रखरखाव और स्वच्छता सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जल एवं स्वच्छता समितियों तथा ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता से इन संरचनाओं की उपयोगिता लंबे समय तक बनी रहेगी। यह पहल जल संरक्षण को केवल एक निर्माण कार्य तक सीमित न रखकर जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सैंड फिल्टर निर्माण कार्य जल संरक्षण के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक एवं टिकाऊ प्रबंधन की दिशा में जिले की दीर्घकालिक विकास रणनीति का हिस्सा है। इससे जल स्रोतों का संरक्षण, भू-जल संवर्धन, स्वच्छ पेयजल उपलब्धता तथा पर्यावरणीय संतुलन को मजबूती मिलेगी। यह पहल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी-6 : स्वच्छ जल एवं स्वच्छता) के अनुरूप भी है, जिसका उद्देश्य सभी के लिए सुरक्षित एवं सतत जल उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में जिले में जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विभिन्न विभागों के समन्वय से अनेक नवाचार आधारित कार्य किए जा रहे हैं। सैंड फिल्टर निर्माण की यह पहल भी उसी श्रृंखला की महत्वपूर्ण कड़ी है, जो जल स्रोतों के संरक्षण के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी।
जिला प्रशासन का यह प्रयास जल संरक्षण को जनहित, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास से जोड़ते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में एक सशक्त पहल के रूप में सामने आया है। इससे जिले के 357 जल स्रोत अधिक स्वच्छ, सुरक्षित एवं टिकाऊ बनेंगे। भू-जल स्तर में सुधार, जल गुणवत्ता का संरक्षण, वर्षा जल का बेहतर प्रबंधन तथा ग्रामीण आजीविका को मजबूती मिलने के साथ धमतरी जिला जल संरक्षण के क्षेत्र में एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में उभरने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह पहल वर्तमान की जल आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित जल संसाधनों की मजबूत नींव तैयार करेगी।